-बिना विधिसम्मत कार्रवाई के रिटायरमेंट लाभ रोकना होगा अवैध
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए स्पष्ट किया कि बिना विधिसम्मत विभागीय कार्रवाई के उनके ग्रेच्युटी, लीव एनकैशमेंट और प्रोविडेंट फंड जैसी रिटायरमेंट लाभ रोकना मनमाना और अवैध है।
जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की एकल पीठ ने याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि एसजीपीसी एक वैधानिक निकाय है और उसके बनाए गए सेवा नियम कानूनी बल रखते हैं। ऐसे में नियमों के उल्लंघन की स्थिति में हाईकोर्ट का क्षेत्राधिकार लागू होता है।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत में बताया कि दशकों सेवा देने के बावजूद उन पर अनियमितताओं के आरोप लगाकर उनके लाभ रोके गए, जबकि न तो उन्हें चार्जशीट दी गई और न ही नियमों के अनुसार विभागीय जांच कराई गई। इससे उन्हें गंभीर आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
एसजीपीसी ने तर्क दिया कि सेवा नियम निजी प्रकृति के हैं और संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत इस पर याचिका योग्य नहीं। अदालत ने यह तर्क खारिज करते हुए कहा कि सिख गुरुद्वारा अधिनियम, 1925 की धारा 69 के तहत एसजीपीसी को कर्मचारियों की नियुक्ति, सेवा शर्तें, निलंबन और बर्खास्तगी तक का अधिकार प्राप्त है।
कार्रवाई से पहले चार्जशीट अनिवार्य
हाईकोर्ट ने साफ किया कि किसी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई से पहले चार्जशीट, जवाब का अवसर और निष्पक्ष जांच अनिवार्य है। केवल आरोप लगाने या जांच लंबित होने के आधार पर रिटायरमेंट लाभ रोकना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। इस फैसले से एसजीपीसी के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को कानूनी सुरक्षा मिली है और उनका रिटायरमेंट लाभ बहाल होने की राह खुल गई है।