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‘सच के लिए हजरत इमाम हुसैन ने दी शहादत’

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कोविड-19 के मद्देनजर रविवार को एतिहासिक जामा मस्जिद में यौमे आशूरा के अवसर पर हजरत इमाम हुसैनकी याद में ऑन लाइन शहीद ऐ करबला कांफ्रेंस का आयोजन मजलिस अहरार इस्लाम ने किया। प्रधानगी शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी ने की। पावन कुरान शरीफ की तलावत कारी मुहम्मद मुहतरम ने की। शायर गुलाम हसन कैसर, कारी मुहम्मद मुस्तकीम करीमी ने नातिया कलाम पेश किया।
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मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी ने कहा कि आज का दिन विश्व के इतिहास मेें बहुत विशेष है इस दिन अल्लाह ताआला ने बड़ी रहमत व बरकत वाला बताया है और इस्लाम धर्म में मुहर्रम की 9 व 10 तारीख को रोजा रखने को कहा गया है। शाही इमाम ने कहा कि आज से 1400 वर्ष पहले आज के दिन करबला के मैदान में पैगंबर इस्लाम हजरत मुहम्मद सलल्लाहु अलैही वस्लम के नवासे हजरत इमाम हुसैन ने अपने पूरे परिवार व साथियों के साथ सच्चाई की आवाज बुलंद करने के कारण शहीद कर दिए गए। उन्होंने कहा कि विश्व भर में सरकारों के खिलाफ सच्चाई की आवाज उठाने का पहला संदेश मैदान ए करबला से हजरत इमाम हुसैन ने दिया,जो कि हमेशा याद रखा जाएगा। शाही इमाम ने कहा कि इस शहादत को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। नायब शाही इमाम मौलाना मुहम्मद रहमानी लुधियानवी ने मैदाने करबला का किस्सा बयान करते हुए हजरत इमाम हुसैन की बहादुरी की दास्तान बया की। उन्होंने कहा कि कयामत तक आने वाले लोगो के लिए करबला का मैदान सच्चाई व इमानदारी देने का संदेश देता रहेगा।
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