लुधियाना के गांव झोरडां में 5 साल पहले हुए जरनैल सिंह कत्लकांड में जिला अदालत ने गुरविंदर सिंह पुत्र गुरचरण सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायधीश डॉ. गुरप्रीत कौर ने गुरविंदर सिंह को अलग अलग आजीवन कारावास के साथ 15-15 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना न भरने की सूरत में एक साल अतिरिक्त कठोर कारावास की सजा काटनी होगी।
अदालत ने दोषी गुरविंदर सिंह के वकील द्वारा की गई सजा माफी की दलील को खारिज कर दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि गुरविंदर सिंह की तमाम कोशिशों के बावजूद ये सच्चाई नहीं बदल सकती कि एक बेकसूर बजुर्ग जरनैल सिंह की जान चली गई। दोषी गुरविंदर सिंह तीन बेटियों का पिता है। सजा सुनाए जाने पर वह अदालत में गिड़गिड़ाया और सजा में नरमी की अपील की, लेकिन अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई।
क्या है पूरा मामला
जरनैल सिंह ने गुरविंदर सिंह से गांव झोरडां में जमीन का सौदा किया था। गुरविंदर सिंह जमीन की रजिस्ट्री नहीं करवा रहा था। इसको लेकर कई बार पंचायत बैठी पर गुरविंदर सिंह ने न रुपये लौटाए और न रजिस्ट्री करवाई। गुरविंदर सिंह ने 13 जून 2020 को अपनी .12 बोर बंदूक से जरनैल सिंह की छाती में दो गोलियां मारीं। जरनैल सिंह की मौके पर मौत हो गई। जरनैल सिंह का इकलौता बेटा जतिंदर सिंह मनीला में फाइनेंस कारोबारी है। उनकी पुत्रवधु कमलजीत कौर लुधियाना ललतों कलां में मायके घर रह रही थी। ससुर के कत्ल की जानकारी मिलने पर कमलजीत कौर झोरडां पहुंची और गुरविंदर सिंह के खिलाफ थाना हठूर में मुकदमा दर्ज करवाया।
तीन नाबालिग बेटियों के भविष्य की दी दुहाई
अधिवक्ता कुलदीप सिंह मंड ने बताया कि गुरविंदर सिंह अदालत में खुद को बेकसूर बताते हुए तीन नाबालिग बेटियों के भविष्य की दुहाई देकर सजा से बचना चाहता था। .12 बोर लाइसेंसी बंदूक की सीएफएल रिपोर्ट में सच का खुलासा हो गया। गुरविंदर सिंह की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने कारतूस के दो खाली खोल और बंदूक बरामद कर ली थी। अब दोषी गुरविंदर सिंह को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।