-उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा का दौरा- ऑटो पार्ट्स एवं हैंड टूल्स संस्थान को मिलेगा नया आयाम
-
संवाद न्यूज एजेंसी
लुधियाना। पंजाब के उद्योगमंत्री संजीव अरोड़ा ने ऑटो पार्ट्स एंड हैंड टूल्स संस्थान का दौरा किया। उनके साथ उद्योग निदेशक सुरभि मलिक और विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इस अवसर पर संस्थान की भविष्य की विकास योजनाओं और उन्नयन को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। उद्योग मंत्री अरोड़ा ने कहा कि औद्योगिक रिसर्च एंड डेवलपमेंट सुविधाओं पर सरकार 200 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इससे आरएंडडी और टेस्टिंग ढांचे को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाया जाएगा।
बैठक में बोर्ड सदस्य उपकार सिंह आहूजा ने उद्योग जगत की प्राथमिकताओं पर जोर देते हुए कहा कि माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (एमएसएमई) क्षेत्र की मजबूती के लिए अनुसंधान एवं विकास (आर एंड डी) ढांचे को सशक्त बनाना समय की मांग है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि संस्थान की टेस्टिंग सुविधाओं को बीआईएस मानकों पर अपग्रेड किया जाना चाहिए, ताकि उद्योगों को प्रमाणन और अनुपालन संबंधी चुनौतियों का किफायती समाधान मिल सके।
आहूजा ने विशेष रूप से ईवी (इलेक्ट्रिक वाहन), उसके घटकों और पावर टूल्स से जुड़े अनुसंधान की दिशा में संस्थान की क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि बदलती तकनीक और बाजार की मांग को देखते हुए पंजाब के उद्योगों को इस क्षेत्र में आगे बढ़ाना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि आधुनिक उपकरण और आरएंडडी ढांचा हमारे एमएसएमई को तेज़ उत्पाद विकास, मजबूत परीक्षण एवं प्रमाणन, और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सक्षम बनाएगा।
इस मौके पर सुरभि मलिक, निदेशक उद्योग ने संस्थान की अब तक की उपलब्धियों को साझा किया। वहीं, डॉ. संजीव कटोच ने संस्थान की मौजूदा संरचना, चल रहे प्रोजेक्ट और विस्तार योजनाओं पर विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया। इसमें नई प्रयोगशालाओं की स्थापना, प्रक्रिया आधुनिकीकरण और उद्योग सहयोग मॉडल शामिल थे। बैठक में सीआईसीयू के आयोजन सचिव जेएस भोगल, एससी रल्हन, अशोक गुप्ता, परवीन चड्ढा, अंगद सिंह सोही, रविंदर गर्ग ने भी भाग लिया। सभी ने भरोसा जताया कि प्रस्तावित उन्नयन से पंजाब की विनिर्माण क्षमता, निर्यात और रोजगार सृजन में बड़ा इजाफा होगा। टेस्टिंग सुविधाओं को बीआईएस मानकों के अनुरूप बनाया जाएगा जिससे एमएसएमई को प्रमाणन और अनुपालन में राहत मिलेगी। इसके साथ ही ईवी और पावर टूल्स पर केंद्रित अनुसंधान क्षमताएं विकसित होंगी।