आलू और प्याज की महंगाई से परेशान केंद्र सरकार ने हालांकि कीमतों को नियंत्रित करने के कई कदम उठाए हैं। दोनों उत्पादों को आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत लाकर स्टॉक लिमिट निर्धारित की जा रही है वहीं न्यूनतम निर्यात मूल्य भी तय कर दिए गए हैं। इसके बावजूद पाकिस्तान को वाघा सीमा के जरिए आलू का निर्यात नहीं रुक पा रहा है। वाघा सीमा के जरिए रोजाना 1500 से 2000 टन आलू का निर्यात किया जा रहा है। सब्जी निर्यातकों का कहना है कि न्यूनतम निर्यात मूल्य पर भी पाक माल भेजने के सौदे हो रहे हैं। निर्यातक ों का कहना है कि जब तक पाकिस्तान में नई फसल नहीं आती, निर्यात जारी रहेगा।
देश में आलू और प्याज की कीमतों में लगातार उछाल देखा जा रहा है। इन उत्पादों की महंगाई को लेकर सरकार चौतरफा घिर रही थी। सरकार ने भी फुल एक्शन दिखाते हुए आलू-प्याज की कीमतों को नीचे लाने के लिए एक के बाद एक कदम उठाए, लेकिन अभी तक इनका बाजार में असर दिखाई नहीं दे रहा है। सरकार ने आलू का न्यूनतम निर्यात मूल्य 450 डालर प्रति टन तय किया है।
अमृतसर के सब्जी निर्यातक जसपाल सिंह का कहना है कि पाकिस्तान में आलू की इस वक्त काफी मांग है। पाकिस्तान के लिए वाघा सीमा से रोजाना 75 से 80 ट्रक आलू का निर्यात किया जा रहा है। इन ट्रकों में 1500 से दो हजार टन आलू पाकिस्तान को भेजा जा रहा है। जसपाल का कहना है कि न्यूनतम निर्यात मूल्य तय होने के बाद भी पाकिस्तान को आलू निर्यात का पड़ता बन रहा है। इसलिए निर्यात में कोई रुकावट नहीं आ रही है और सरकार द्वारा तय मूल्य पर ही माल भेजा जा रहा है। जसपाल का कहना है कि नई फसल आने तक पाक में आलू की मांग बनी रहेगी और जब तक संभव हुआ भारत से निर्यात किया जाएगा। जसपाल ने कहा कि पिछले साल टमाटर का पाकिस्तान को जम कर निर्यात किया गया था, लेकिन इस बार टमाटर नहीं जा रहा है।
वहीं कंफेडरेशन ऑफ पटेटो सीड्स फारमर्स के प्रधान सुखजीत सिंह भट्टी का कहना है कि रिटेल मार्केट में आलू के दाम 25 से तीस रुपये प्रति किलो हैं, लेकिन इनका लाभ किसान को नहीं मिल पा रहा है। आज भी कोल्ड स्टोर पर आलू की कीमत 15 से 16 रुपये प्रति किलो ही बनी हुई है। उन्होंने कहा कि अक्तूबर में नई फसल आने से पहले कीमतों में मजबूती का दौर जारी रहेगा।