मोगा के जिला एवं सेशन जज गुरजंट सिंह की अदालत ने बहुचर्चित 12 साल पुराने हत्या के केस में एक परिवार के छह सदस्यों को उम्र कैद की सजा सुनाई है।
पुलिस की ओर से युवक की मौत के लिए जिम्मेवार ठहराए मृतक के चाचा किशन सिंह को बरी कर दिया है।
थाना बाघापुराना पुलिस ने 3 नंबर 2001 को पूर्व फौजी बलदेव सिंह गांव चड़िंक के बयान पर सरकारी अध्यापक दर्शन सिंह, उसके लड़के कुलविंदर सिंह, भाई वेटरनरी डाक्टर गुरदेव सिंह, भतीजे जसविंदर सिंह, राजविंदर सिंह और अजमेर सिंह के खिलाफ केस दर्ज किया था।
पीड़ित का आरोप है कि आरोपियों ने उनके घर में दाखिल होकर बेटे जगसीर सिंह की छाती में गोली मारकर हत्या कर दी थी। पीड़ित परिवार के दूसरे सदस्यों पर जानलेवा हमला कर दिया था। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। आरोपियों के पारिवारिक सदस्यों ने इस मामले को झूठा बताते हुए जांच की मांग की थी। मामले में आरोपियों को तीन महीने बाद जमानत मिल गई थी।
पुलिस ने अपनी जांच कहा था कि मृतक जगसीर सिंह की मौत उनकी अपनी बंदूक से हुई है। इसलिए मृतक के चाचा किशन सिंह के खिलाफ धारा 304 ए के तहत आरोप पत्र पेश किए गए। बलदेव सिंह ने अपने वकील जरिए अदालत में आरोपियों के खिलाफ फिर मामला उठाया था।
अदालत ने केस की सुनवाई के दौरान फिर से आरोपियों खिलाफ हत्या और जानलेवा हमला करने की धाराओं के आरोप तय किए। इस मामले में जिला और सेशन जज गुरजंट सिंह ने दोनों पक्षों के वकीलों को दलीलों और सबूतों को ध्यान में रखते हुए सारे आरोपियों को हत्या और जानलेवा हमले करने के लिए दोषी ठहराया। उनको हत्या के लिये उम्रकैद और घर में दाखिल होकर हमला करने के आरोप में 10 साल की सजा सुनाई है।