नामधारी समुदाय के सतगुरु की गद्दी और संपत्ति पर पिछले कई साल से विवाद चल रहा है। 13 दिसंबर 2012 को नामधारी समुदाय के सतगुरु जगजीत सिंह के निधन के बाद उनके भतीजे ठाकुर दलीप सिंह और ठाकुर उदय सिंह में गद्दी को लेकर संघर्ष शुरू हो गया।
तब नामधारी संगत ने माता चंद कौर को नए सतगुरु का नाम तय करने का अधिकार दिया था। सतगुरु जगजीत सिंह और माता चंद कौर ने ठाकुर उदय सिंह को गोद ले रखा था क्योंकि उनकी केवल एक बेटी साहिब कौर हैं। ठाकुर उदय सिंह को सतगुरु बनाने के बाद से ही उनके और ठाकुर दलीप सिंह के बीच तनातनी बढ़ गई थी।
संगत ने की दूसरे गुट के खिलाफ नारेबाजी
माता की हत्या के बाद श्री भैणी साहिब में नामधारी समर्थकों में भारी रोष है। सोमवार शाम को जब माता चंद कौर का पार्थिव शरीर नामधारी मुख्यालय पहुंचा तो गुस्साई संगत ने दूसरे गुट के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। संगत ने सीधे ठाकुर दलीप सिंह पर निशाना साधा और उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
मौके पर तैनात पुलिस और मुख्यालय के पदाधिकारियों ने किसी तरह संगत को समझा कर शांत किया। संगत के अनुसार गद्दी विवाद ही हत्या की जड़ है वहीं पुलिस कमिश्नर जतिंदर सिंह औलख का कहना है कि अभी तक यह कहना कठिन है कि यह हत्या गद्दी के विवाद को लेकर हुई है।
पहले भी हो चुके हैं हमले
- सतगुरु जगजीत सिंह के निधन से पहले 12 अप्रैल 2011 को उनके समर्थक और मोहाली निवासी अवतार सिंह तारी को श्री भैणी साहिब चौक में अज्ञात हमलावरों ने गोलियों से भून दिया था।
- श्री भैणी साहिब के प्रेस सचिव लखबीर सिंह बद्दोवाल ने कहा कि 11 अगस्त 2013 को इंग्लैंड के लिसेस्टर शहर में समागम के दौरान सतगुरु उदय सिंह पर कुछ युवकों ने हमला कर दिया था।
- चार दिसंबर 2015 को जालंधर में सुसाइड बम ने ठाकुर उदय सिंह को निशाना बनाना था, लेकिन उससे पहले ही यह बम फट गया था। बाद में पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद यह खुलासा हुआ था कि आरोपी ठाकुर उदय सिंह पर हमला करने आए थे।
नामधारी समाज के हैं लाखों अनुयायी
नामधारी समुदाय से जुड़े लाखों लोग देश और विदेशों में हैं। सभी का माता चंद कौर के साथ खास लगाव है। सतगुरु जगजीत सिंह के निधन के बाद श्री भैणी साहिब में अधिकतर सामाजिक कार्य माता चंद कौर की देखरेख में ही होते थे।
देश-विदेश में है अरबों की संपत्ति
नामधारी समुदाय की देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अरबों रुपये की संपत्ति है। नामधारी मुख्यालय के साथ शिक्षण संस्थान, गोशाला और सैकड़ों एकड़ जमीन है। इसके अलावा लुधियाना में सतगुरु प्रताप सिंह अस्पताल के अलावा बंगलुरू में भी काफी संपत्ति है।