प्लास्टिक दाना, कागज, तेल, पेंट, केमिकल और कलपुर्जों के दाम 20 से 25 फीसदी तक बढ़े हैं। इससे साइकिल निर्माताओं पर लागत का दबाव काफी बढ़ गया है। जी-13 साइकिल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के सदस्यों की सतलुज क्लब में बैठक हुई।
कच्चे माल और औद्योगिक सामग्रियों की लगातार बढ़ती कीमतों ने साइकिल उद्योग की उत्पादन लागत बढ़ा दी है। पिछले एक महीने में स्टील के दाम करीब 7,000 रुपये प्रति टन बढ़े हैं।
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प्लास्टिक दाना, कागज, तेल, पेंट, केमिकल और कलपुर्जों के दाम 20 से 25 फीसदी तक बढ़े हैं। इससे साइकिल निर्माताओं पर लागत का दबाव काफी बढ़ गया है। जी-13 साइकिल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के सदस्यों की सतलुज क्लब में बैठक हुई।
इसमें कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि और उत्पादन पर असर पर चर्चा हुई। प्रधान राजिंदर जिंदल और महासचिव रोहित पाहवा ने इसे चुनौतीपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि बढ़ती लागत पर मौजूदा कीमतों पर कारोबार मुश्किल है। निर्माताओं को अपनी उत्पादन लागत और बाजार की परिस्थितियों की समीक्षा करनी पड़ सकती है।
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मूल्य निर्धारण पर एसोसिएशन का रुख
कुछ निर्माता प्रति साइकिल करीब 160 रुपये तक कीमत बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं। एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि वह कीमतों में बढ़ोतरी का कोई सामूहिक फैसला नहीं कर रही है। प्रत्येक निर्माता अपनी व्यावसायिक परिस्थितियों के अनुसार स्वतंत्र रूप से कीमतों की समीक्षा करेगा। यह 160 रुपये तक की संभावित बढ़ोतरी केवल एक आकलन है, अनिवार्य घोषणा नहीं।