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आरोपियों की तैनाती थाना मॉडल टाउन में थी, ड्यूटी डुगरी थाने में करते थे 

Mon, 02 May 2016 09:50 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना
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पुलिस - फोटो : अमर उजाला
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पुलिस के दबाव से तंग आकर डुगरी निवासी इंद्रपाल सिंह आहूजा के आत्महत्या करने के मामले में सोमवार को नया खुलासा हुआ। इंद्रपाल पर दबाव बनाने के आरोपी एएसआई बूटा सिंह और कांस्टेबल स्वर्ण सिंह की थाना डुगरी में तैनाती ही नहीं थी। ऑफिशियली दोनों थाना मॉडल टाऊन में तैनात थे।
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सस्पेंड होने से पहले तक दोनों की हाजिरी थाना मॉडल टाउन में लग रही थी, लेकिन अधिकारियों की मंजूरी लिए बिना ही दोनों थाना डुगरी में काम कर रहे थे। आरोपी गैंगस्टर गोरु बच्चा को पकड़ने के लिए चल रही जांच में भी शामिल हैं। जांच के दौरान ही उन्होंने इंद्रपाल को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था।

बताया जा रहा है कि थाना डुगरी से पहले इंस्पेक्टर दविंदर चौधरी थाना मॉडल टाऊन में तैनात थे। दोनों मुलाजिमों की इंस्पेक्टर चौधरी के साथ काफी नजदीकी थी। उन्होंने ही दोनों मुलाजिमों को इस केस में अपने साथ रखा था, लेकिन दोनों के अपने साथ काम करने के बारे में चौधरी ने किसी अधिकारी को सूचना देना जरूरी नहीं समझा। 
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जहां इंस्पेक्टर दविंदर, वहीं कांस्टेबल स्वर्ण सिंह
इंस्पेक्टर दविंदर सिंह और कांस्टेबल स्वर्ण सिंह की आपस में काफी अच्छी पटती थी। दोनों में इतनी अच्छी जुगलबंदी थी कि जहां-जहां इंस्पेक्टर चौधरी का तबादला होता था, उसी जगह कांस्टेबल स्वर्ण सिंह का तबादला भी हो जाता था। इंस्पेक्टर चौधरी थाना डिवीजन आठ में तैनात थे तो स्वर्ण सिंह भी वहीं था। उसके बाद इंस्पेक्टर चौधरी का तबादला मॉडल टाऊन हुआ तो कांस्टेबल स्वर्ण सिंह भी तबादला करवाकर वहीं चला गया। अब भी वह थाना डुगरी में काम कर रहा था, जबकि उसकी ऑफिशियल तैनाती थाना मॉडल टाउन में थी। 

अपने खास मुलाजिम को साथ ही रखते है थानाध्यक्ष
शहर में ऐसे कई एसएचओ है जो अपने खास मुलाजिम को अपने साथ ले जाते हैं। जब एसएचओ की एक थाने से दूसरे थाने में बदली होती है तो वह अपने खास मुलाजिम को बिना बदली के ही साथ ले जाते हैं। बाद में कोई न कोई जुगाड़ कर उक्त मुलाजिम को अपने साथ पक्का करा लेते हैं।

इसका एक कारण यह भी है कि एक थाने से दूसरे थाने में गए एसएचओ सभी मुलाजिमों पर विश्वास नहीं कर पाते। जिस मुलाजिम के साथ उनकी पहले से ट्यूनिंग होती है, वह उसी के साथ हर बात शेयर करता है और हर काम के लिए उसी को भेजता है। 

पहले भी सामने आ चुके है ऐसे मामले
26 सितंबर 2014 में हुए जमालपुर शूटआउट कांड में भी ऐसा मामला सामने आया था। मामले में आरोपी कांस्टेबल यादविंदर सिंह के आर्डर थाना सराभा नगर के थे। उसकी हाजिरी भी वहीं थी, लेकिन वह थाना माछीवाड़ा के तत्कालीन एसएचओ इंस्पेक्टर मनिंदर सिंह के साथ ड्यूटी दे रहा था। पंजाब पुलिस के पूर्व इंस्पेक्टर मनजिंदर सिंह जब थाना सराभा नगर में एसएचओ थे, तब कांस्टेबल यादविंदर सिंह भी वहीं तैनात था। जब मनजिंदर सिंह का तबादला थाना माछीवाड़ा में हुआ, तब कांस्टेबल भी उसके साथ थाना माछीवाड़ा चला गया। जबकि उसकी हाजिरी थाना सराभा नगर में ही लग रही थी।

एडिशनल डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस टू डॉ. संजीव गर्ग ने कहा ‌कि जांच में सामने आया है कि बूटा सिंह और स्वर्ण सिंह की ऑफिशियल तैनाती थाना मॉडल टाउन की थी, लेकिन वह ड्यूटी थाना डुगरी में कर रहे थे। वह इस मामले की जांच कर सारी रिपोर्ट पुलिस कमिश्नर जतिंदर सिंह औलख को देंगे। जिसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। 
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