साइबर अपराधी नए-नए तरीकों से लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी, विजिलेंस व अन्य एजेंसियों के अधिकारी बनाकर लोगों को डरा धमका कर उन्हें गिरफ्तारी का डर दिखाकर लाखों रुपये की ठगी कर रहे हैं। ऐसा ही एक मामला पंजाब के लुधियाना में भी सामने आया है। जहां शातिरों ने यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर को 14 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा और उनसे 20 लाख रुपये की ठगी की।
साइबर ठगों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर महानगर की गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंस यूनिवर्सिटी (गडवासू) के प्रोफेसर डॉ. डीएस मलिक से 20 लाख रुपये ठग लिए। ठगों ने प्रोफेसर को ह्यूमन ट्रैफिकिंग केस में फंसाने की धमकी देकर 14 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा। इस दौरान ठगों ने प्रोफेसर से ठगी की। प्रो. डीएस मलिक ने मामले की शिकायत पुलिस के उच्चाधिकारियों के पास की। जांच के बाद पुलिस की साइबर सेल ने मामला दर्ज कर लिया है।
शिकायत के अनुसार प्रोफेसर डॉ. मलिक को दो जुलाई को एक फोन कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताया। इसके बाद वीडियो कॉल के जरिये फर्जी पहचान और केस से जुड़े कागजात दिखाकर प्रोफेसर को डरा दिया। उन्हें बताया कि वे ह्यूमन ट्रैफिकिंग में फंस चुके हैं। गिरफ्तारी से बचने के लिए तुरंत पैसे देने होंगे। डर के कारण डॉ. डीएस मलिक ने पत्नी के साथ जॉइंट अकाउंट से 10 लाख रुपये आरटीजीएस से ट्रांसफर किए। बाद में और पैसे भी ट्रांसफर किए।
इसके बाद 15 जुलाई को एक और वीडियो कॉल आई जिसमें खुद को आईपीएस बताने वाले शख्स ने 10 लाख रुपये और मांगे। प्रोफेसर ने बैंक ऑफ बड़ौदा से लोन लेकर रकम ठगों के अकाउंट में ट्रांसफर कर दी। पीड़ित ने पुलिस को बताया कि दो से 15 जुलाई तक वह डिजिटल अरेस्ट रहे। वे ऑनलाइन माध्यम से छात्रों को पढ़ा रहे थे, ताकि किसी को शक न हो। साइबर ठग उन्हें डराते रहे कि यदि उन्होंने किसी के साथ ये बात साझा की तो वे उन्हें जेल भेज देंगे।
लेनदेन के एसएमएस से खुला मामला
मामले का खुलासा तब हुआ जब प्रोफेसर की पत्नी को जॉइंट अकाउंट से लेनदेन का एसएमएस आया। उसने तुरंत अपने पति बातकर पूरे मामले की जानकारी ली। इसके बाद दोनों साइबर सेल थाना पहुंचे और शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने केस दर्ज कर साइबर ठगों की पहचान के लिए तकनीकी जांच शुरू कर दी है। जिस बैंक के खातों में रुपये ट्रांसफर हुए हैं, उनकी डिटेल खंगाली जा रही है।