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कोर्ट आदेश के बावजूद नहीं बनाया असला लाइसेंस, सीपी दफ्तर अटैच के आदेश

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कोर्ट आदेश के बावजूद नहीं बनाया असला लाइसेंस
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2012 में असलाह लाइसेंस के लिए किया था आवेदन
अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना। सोमवार लुधियाना पुलिस कमिश्नर दफ्तर में उस समय हड़कंप मच गया, जब जुडिशियल मजिस्ट्रेट सुमित सभ्रवाल की कोर्ट की तरफ से जारी पुलिस कमिश्नर दफ्तर और फर्नीचर अटैच के आदेश की पालना करने के लिए वैलफ अफसर पहुंच गए। वैलफ अफसर ने सीपी दफ्तर की पूरी डिटेल एकत्र कर ली है, जिसे आगे कार्रवाई के लिए अदालत में पेश किया जाएगा। अगली सुनवाई 5 मार्च को होगी। अब या तो सीपी दफ्तर को पीड़ित व्यक्ति को लाइसेंस जारी करना पड़ेगा या फिर दफ्तर अटैच करने की नौबत को झेलना पड़ेगा।
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एडवोकेट राजेश बातिश ने बताया कि दुर्गापुरी (हैबोवाल) निवासी अमनदीप सिंह ने साल 2012 में असलाह लाइसेंस के लिए आवेदन किया था। लेकिन पुलिस कमिश्नर दफ्तर ने लाइसेंस जारी करने से मना कर दिया। 21 अक्टूबर 2014 को पीड़ित ने उनके माध्यम से सीपी के खिलाफ सिविल सूट दायर कर दिया। 21 जुलाई 2016 को अदालत ने मामले की सुनवाई करने के बाद डिग्री पास करते सीपी दफ्तर को लाइसेंस जारी करने के लिए आदेश जारी किए थे। 2018 में अदालत के आदेशों की पालना करवाने हेतु दोबारा अदालत ने आवेदन किया गया। पुलिस कमिश्नर दफ्तर ने अदालत ने दोबारा लाइसेंस जारी करने पर कुछ एतराज लगा दिए। इन एतराज पर सुनवाई करते अदालत ने सभी को खत्म कर दिया। आखिरकार अदालत ने पुलिस कमिश्नर के खिलाफ वारंट जारी कर दिए। इन वारंट की तामिल नहीं हो सकी। 11 फरवरी 2019 को उन्होंने अदालत में सीपी दफ्तर को अटैच करने का आवेदन दायर कर दिया। अदालत ने इस आवेदन पर सीपी दफ्तर और फर्नीचर को अटैच करने के आदेश जारी कर दिए। सोमवार को वह अदालत के वैलफ को साथ लेकर सीपी दफ्तर गए थे। वहां पर सीपी दफ्तर और वहां पर रखे फर्नीचर को देखा गया।
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