पूर्व सतगुरु जगजीत सिंह की समाधि के पास ही माता चंद कौर के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार दोपहर एक बजे किया जाएगा। इस अवसर पर लाखों की संगत पहुंचने की उम्मीद है। सतगुरु ठाकुर उदय सिंह सोमवार देर शाम बंगलुरू से श्री भैणी साहिब पहुंचे। उन्होंने संगत से शांति की अपील की है। ठाकुर उदय सिंह ने कहा कि इस दुखदायी घड़ी में शांति कायम रखना जरूरी है। सतगुरु उदय सिंह ने अकादमी में पहुंचकर घटनास्थल का दौरा भी किया।
सादा जीवन जीती थीं माता चंद कौर
माता चंद कौर दिन भर धार्मिक और समाजसेवा के कार्यों में व्यस्त रहती थीं। उनका पूरा जीवन सादगी से बीता। माता चंद कौर तड़के ढाई बजे उठ जाती थी और दो घंटे तक नाम सिमरन करती थीं। इसके बाद लंगर हॉल में जाकर संगत के साथ सेवा करती थीं। सफाई को लेकर उनकी खास तवज्जो थी। वे पार्क में कई बार खुद ही घास साफ करने लग जाती थी।
बाग में उगाई गई सब्जियों की देखभाल में सहयोग करती थीं। नामधारी मुख्यालय के सचिव लखबीर सिंह का कहना है कि माता चंद कौर का जीवन सादगी से पूर्ण था। वे सुबह दो घंटे, दोपहर और शाम को एक एक घंटा नाम सिमरन करती थी। उन्होंने हमेशा ही संगत को प्रभु का नाम सिमरन करने का मंत्र दिया।
माता चंद कौर ने हमेशा ही जरूरमंदों की सहायता की। बाहर से आई संगत का खास ध्यान रखती थी, तभी वे संगत में अति प्रिय थीं। अक्सर अकादमी में जाकर बच्चों के साथ वक्त व्यतीत करती थीं और वहां पर बच्चों को नाम सिमरन के लिए प्रेरित करती थीं। लखबीर ने कहा कि माता जी का जीवन नाम सिमरन और समाज की सेवा में ही लग गया।
टकराव की संभावना के मद्देनजर सुरक्षा कड़ी
श्री भैणी साहिब में मंगलवार को अंतिम संस्कार में दोनों गुटों के बीच टकराव की संभावनाओं को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था काफी कड़ी कर दी गई है। सोमवार को भी सैकड़ों की संख्या में समर्थकों ने दूसरे गुट के खिलाफ जम कर नारेबाजी की। इससे वहां का माहौल तनावपूर्ण हो गया था। पुलिस ने नामधारी मुख्यालय के चप्पे चप्पे की निगरानी शुरू कर दी है।
माता चंद कौर का तीन डाक्टरों के बोर्ड ने किया पोस्टमार्टम
लुधियाना। माता चंद कौर का पोस्टमार्टम सिविल अस्पताल में सोमवार शाम को किया गया। उनके पोस्टमार्टम के लिए तीन डाक्टरों का बोर्ड बनाया गया। जिसमें डॉ. हरीश किरपाल, डॉ. गौरव सगड़ और डॉ. सीमा चोपड़ा शामिल थी।
रिपोर्ट में स्पष्ट है कि माता चंद कौर को दो गोलियां लगी। एक गोली सिर में और दूसरी गोली छाती में लगी। उम्र ज्यादा होने के कारण वह गोली की पीड़ा सह नहीं सकी और उनकी मौत हो गई।