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एक करोड़ का काऊ टैक्स, पशु रखने को जगह नहीं

Thu, 28 Apr 2016 10:05 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बठिंडा
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बठिंडा में लाव‌ारिस घूमते पशु। - फोटो : अमर उजाला
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नगर निगम काऊ टैक्स लगाने के बावजूद लावारिस पशुओं पर नियंत्रण करने में विफल रहा है। इस वजह से आए दिन जिले और निगम की हद में लावारिस पशुओं की संख्या बढ़ती जा रही है। इस मामले में निगम अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।
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एक करोड़ से अधिक का काऊ टैक्स एकत्र होने के बावजूद निगम ने लावारिस पशुओं को नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए। जिले मेें चल रही करीब 8 गोशालाएं भी भरी हुई हैं। इस वजह से गोशाला प्रबंधक भी पशु रखने में अपने हाथ खडे़ कर रहे हैं। 

 शहर की चार मुख्य गोशालाओं के अध्यक्ष जीवा राम गोयल का कहना था कि गोशालाओं में पहले से ही क्षमता से ज्यादा पशु रखे हुए हैं। उन्हेें प्रशासन और निगम बिलकुल भी सहयोग नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि उन्होंने ही निगम को काऊ टैक्स लगाने का विचार दिया था। इस वजह से अब निगम काऊ टैक्स तो ले रहा है, लेकिन गोशालायों में स्थित पशुओं को डाइट देने में आनाकानी कर रहा है।
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गांव हररायपुर में जो नई गोशाला बननी है, उसमें 3000 पशुओं की क्षमता है। निगम और प्रशासन उक्त गोशाला का काम बड़ी धीमी गति से करवा रहे हैं। इससे लगातार लावारिस पशु सड़कों पर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे तीन हजार से अधिक लावारिस पशुओं को गोशालायों में रखे हुए हैं, जो क्षमता से ज्यादा हैं। उन्होंने मांग करते हुए कहा कि प्रशासन और निगम लावारिस पशुओं की समस्या को गंभीरता से ले नहीं तो आने वाले समय हालात काफी बदतर हो जाएंगे। 


निगम काऊ टैक्स लेना बंद करे : माहेश्वरी 
समाजसेवी सोनू माहेश्वरी का कहना है कि शराब पर 10 रुपये, बीयर पर 5 रुपये, होटल नॉन एसी समागम के 500 रुपये, एसी समागम के 1000 रुपये के अलावा अन्य वस्तुओं पर निगम काऊ टैक्स वसूल कर रहा है, जो गलत है। अगर लावारिस पशुओं को निगम कंट्रोल ही नहीं कर सकता तो वह काऊ टैक्स लेना बंद कर दें। उन्होंने कहा कि वे आने वाले दिनों में हाईकोर्ट जाएंगे।

लावारिस पशुओं से पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिलाने की कोशिश करेंगे। इसके साथ अदालत से आग्रह करेंगे कि वे लावारिस पशुओं संबंधी निगम की जिम्मेदारी सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि निगम ने एक मार्च को लावारिस पशुओं को पकड़ने की मुहिम तो शुरू की थी, लेकिन वह दो दिन में ही बंद हो गई। उन्होंने कहा कि जब मुहिम शुरू हुई थी तो बड़े-बडे़ नेताओं ने फोटो शूट करवाया था। माहेश्वरी ने बताया कि बीते दो माह में 9 हादसे लावारिस पशुओं के चलते हो चुके हैं। इसमें कई जानें जा चुकी हैं, फिर भी निगम चुप्पी साधे हुए हैं। उनका कहना है कि पूरे जिले में करीब छह हजार लावारिस पशु हैं।

लावारिस पशुओं को लेकर ठोस रणनीति बनाई जा रही है। गोशाला तो पहले से ही फूल हो चुकी है। जैसे जैसे उनको किसी भी गोशाला में जगह मिल रही है, वे वैसे वैसे उनको वहां पर छोड़ रहे हैं।
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-कमल कांत गोयल, असिस्टेंट कमिश्नर, नगर निगम 
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