लुधियाना के जगराओं पुल को दीवार देकर बन्द करते कर्मचारी।
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नगर निगम लुधियाना ने जगरांव पुल के पुनर्निर्माण को लेकर अधिकारियों की तकनीकी कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी पुल निर्माण से संबंधी हर तरह की रणनीति बनाएगी।
टीम में निगम के चीफ इंजीनियर लक्ष्मण दास, निगरान इंजीनियर पवन शर्मा, कार्यकारी इंजीनियर राहुल गगनेजा और हरपाल सिंह भुल्लर को शामिल किया गया है। निगम कमिश्नर घनश्याम थोरी का कहना है कि जगरांव पुल के निर्माण को तय वक्त में पूरा कर लिया जाएगा।
सवा सौ से अधिक वर्ष पुराने जगरांव पुल की जर्जर हालत के बाद इसे यातायात के लिए बंद कर दिया गया है। केवल दोपहिया वाहन को ही पुल पर से गुजरने की इजाजत है। प्रशासन को उम्मीद है कि इस पुल का निर्माण एक साल में पूरा कर लिया जाएगा।
1888 में बना जगरांव पुल जर्जर हाल होने के कारण 14 जुलाई से यातायात के लिए बंद है। शहर के यातायात को अन्य मार्गों पर डायवर्ट किया गया है। पहले पुल की चौड़ाई सात मीटर थी, अब इसे बढ़ा कर दस मीटर करने का प्रस्ताव है। नए प्रस्ताव के तहत पुल का डिजाइन तैयार कर रेलवे दो सप्ताह में निगम को सौंप देगा। रेलवे में फिरोजपुर रोड के डीआरएम अनुज प्रकाश का कहना है कि रेलवे की कोशिश है कि पुल का निर्माण निर्धारित एक साल में पूरा कर लिया जाए।
शहर की लाइफ लाइन है पुल
लुधियाना का जगरांव पुल शहर की लाइफ लाइन माना जाता है। शहर के ट्रैफिक का बड़ा हिस्सा रोजाना इसी पुल से गुजरता है, लेकिन खस्ता हालत के कारण इसे असुरक्षित घोषित किया गया था। अब लोहा और ईंट गिरने के कारण इसे बंद कर दिया गया था। अब पुल को तोड़कर नया पुल बनाने के लिए निगम, सूबा सरकार और रेलवे आपस में तालमेल कर रहे हैं।
लुधियाना नगर निगम ने इसके लिए 11.50 करोड़ रुपये का एस्टिमेट भी मंजूर करा लिया है। निगम आयुक्त घनश्याम थोरी का कहना है कि फंड देने की मंजूरी का पत्र रेलवे को भेज दिया गया है।