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तैराकी ट्रायल में असफल अभ्यर्थी को नियुक्ति का अधिकार नहीं: हाईकोर्ट

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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियमों में कोई ढील नहीं दी जा सकती और न्यूनतम मानक तक प्रदर्शन न करने वाले अभ्यर्थी को मौसम या अन्य परिस्थितियों के हवाले से राहत नहीं दी जा सकती। खेल कोटा भर्ती प्रक्रियाओं की निष्पक्षता और मानकों की अनिवार्यता को अदालत ने सर्वोपरि माना है।
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जस्टिस जगमोहन बंसल ने पंजाब पुलिस में सब-इंस्पेक्टर (स्पोर्ट्सपर्सन) भर्ती से संबंधित जशनदीप सिंह की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि न्यायालय भर्ती बोर्ड के निर्णय में तभी हस्तक्षेप करेगा जब स्पष्ट मनमानी, दुर्भावना, भेदभाव या नियमों का उल्लंघन हो, जो इस मामले में नहीं पाया गया।
मामला वर्ष 2016 के विज्ञापन से जुड़ा है, जिसमें बैकवर्ड क्लास श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिए एक्वाटिक विधा (तैराकी/वाटर पोलो) ट्रायल आयोजित किया गया था। खेल ट्रायल के लिए कुल 20 अंक निर्धारित थे और न्यूनतम 50 प्रतिशत (10 अंक) अनिवार्य थे। इस ट्रायल में कुल चार उम्मीदवार शामिल हुए, लेकिन कोई भी न्यूनतम अंक हासिल नहीं कर सका।
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ठंडे मौसम और पूल की परिस्थितियों का हवाला
जशनदीप सिंह ने दावा किया कि उनका 50 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक का समय 30.30 सेकंड था, जबकि मानक 28.25 सेकंड था। उन्होंने ठंडे मौसम और पूल की परिस्थितियों का हवाला देकर राहत की मांग की। अदालत ने कहा कि सभी अभ्यर्थियों का ट्रायल समान पूल और समान परिस्थितियों में कराया गया, इसलिए मौसम को आधार बनाकर किसी को विशेष लाभ देना अन्यायपूर्ण होगा। हाईकोर्ट ने इस फैसले के माध्यम से यह संदेश भी दिया कि चुनावी और खेल कोटा भर्ती में निष्पक्षता और मानकों का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी परिस्थिति में इसे कमजोर नहीं किया जा सकता।
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