शिरोमणि अकाली दल अमृतसर के प्रधान सिमरनजीत सिंह मान ने कहा है कि 1994 में प्रकाश सिंह बादल, अमरिंदर सिंह, सुरजीत बरनाला समेत कई नेताओं ने श्री अकाल तख्त के सामने खालिस्तान के लिए आखिरी दम तक लड़ने की शपथ ली थी। बादल ने एक वक्त तो भारतीय संविधान तक फाड़ा था, लेकिन अब उन्होंने अपना ट्रैक बदल लिया है। हम उनके आदेशों को ही आगे बढ़ा रहे हैं। मान सरबत खालसा में खालिस्तान की मांग के सवाल का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि 1986 और 2015 के सरबत खालसा में भी यह मांग की गई है। मान वीरवार को डीएमसी अस्पताल में सूरत सिंह खालसा से मिलने पहुंचे थे। पत्रकारों से बातचीत में मान ने कहा कि खालसा 16 जनवरी से बंदी सिखों की रिहाई के लिए भूखहड़ताल कर रहे हैं। सरकार उनका जब्री इलाज करा रही है। उनकी हालत नाजुक है और नाक के जरिए उनको दवा दी जा रही है। मान ने दावा किया कि बंदी सिखों की रिहाई को लेकर सरकार कतई गंभीर नहीं है। असम में उल्फा विद्रोहियों के साथ केंद्र ने बातचीत शुरू की है। उनका तर्क था कि सभी मसलों का हल बातचीत से संभव है। मान ने साफ किया कि सूबा सरकार द्वारा जेलों में बंद किए लीडरों से मुलाकात करके आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।
पंजाब में बेअदबी के मामलों पर मान ने कहा कि सरकार इस संबंध में पूरी तरह से फेल साबित हुई है। सरकार अभी तक बेअदबी करने वालों को गिरफ्तार नहीं कर पाई है। इससे सिखों में रोष है। शिअद की सद्भावना रैली में भी इस मसले पर कोई दिशा नहीं दिखाई गई। सरबत खालसा में कांग्रेसियों के आने पर मान ने कहा कि इसमें सभी संतों समेत तमाम राजनीतिक पार्टियों के लोगों को बुलाया गया था। सरबत खालसा किसी एक पार्टी का नहीं, बल्कि सिख कौम का था। इस अवसर पर शिअद अमृतसर के कई पदाधिकारी मौजूद रहे।