इसके बाद वह मामले की जमानत लेने के लिए थाने के चक्कर काटता रहा। हर बार उसे कोई बहाना बनाकर वापस भेज दिया जाता। आखिरकार वह न्याय लेने के लिए अदालत पहुंच गया। अदालत ने 27 अक्तूबर को आदेश जारी कर थाने से जमानत लेने को कहा।
27 अक्तूबर को जब वह बेटों के साथ थाने में जमानत लेने गया। वहां छोटे बेटे गोपाल सिंह की जमानत ले ली गई। बड़े बेटे गुरप्रीत सिंह व उसकी जमानत नहीं ली गई। शाम तक उन्हें थाने में बैठा कर रखा गया।
पीड़ित का आरोप है कि शाम को थानेदार विक्रमजीत सिंह वहां पहुंच गया। उसे व उसके बड़े बेटे को दोबारा थाने में बंद कर दिया गया। उनके खिलाफ सीआरपीसी की धारा 107 व 150 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया। 28 अक्तूबर को उन्हें जमानत दी गई। इसके बाद उसने 29 अक्तूबर को एसएसपी चरणजीत सिंह के पास पेश होकर लिखित शिकायत दी।
मामले में सीटू के राष्ट्रीय नेता व पूर्व विधायक तरसेम जोधा का कहना है कि जमीन पर कब्जा करने के मामले में कानून अपनी कार्रवाई करेगा। एक अमृतधारी व्यक्ति को उसके बेटों के सामने नग्न कर पीटने के मामले को सहन नहीं किया जा सकता।
इस संबंध में तीन नवंबर को कई जत्थेबंदियों की बैठक बुलाई गई है। इस बैठक के बाद आरोपी थाना प्रभारी के खिलाफ संघर्ष शुरू किया जाएगा। उधर, थाना प्रभारी विक्रमजीत सिंह का कहना है कि नग्न करने और मारपीट करने के आरोप पूरी तरह से गलत हैं। उन्होंने सिर्फ कानून के अनुसार मामला दर्ज किया है। अमृतधारी किसान के साथ मारपीट नहीं की गई है।
अमृतधारी किसान की शिकायत मिली है। मामले की जांच दाखा डीएसपी गुरबंस सिंह को सौंपी गई है। जांच रिपोर्ट के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। - चरणजीत सिंह सोहल, एसएसपी, लुधियाना ग्रामीण