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गोवा से निकला बिजली का हौवा

Thu, 11 Apr 2013 05:30 AM IST
Ludhiana
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लुधियाना/जालंधर। पंजाब सरकार ने बिजली में भारी बढ़ोतरी की है। इससे प्रदेश में हाहाकार मच गया है। सहमे उद्यमी कह रहे हैं कि सत्तारूढ़ अकाली-भाजपा के गोवा चिंतन से ही यह हौवा निकला है। सबसे ज्यादा बोझ उद्योग और कम बिजली खर्च करने वाले घरेलू उपभोक्ताओं पर डाला गया है। अकेल इंडेक्शन फर्नेस उद्योग पर ही सालाना 12 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ डाला गया है। आर्क फर्नेस उद्योग के लिए बिजली की दरों में 12.83 फीसदी की बड़ी वृद्धि की गई है।
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रेट चार्ट (दरें पैसा प्रति यूनिट)
घरेलू
कैटेगरी मौजूदा दरें नई दरें कुल वृद्धि वृद्धि प्रतिशत
100 यूनिट तक 409 456 47 14.49 फीसदी
101-300 यूनिट 549 602 53 9.65 फीसदी
300 यूनिट से ऊपर 581 644 63 10.84 फीसदी

गैर आवासीय
100 यूनिट तक 603 645 42 6.96 फीसदी
100 यूनिट से ऊपर 603 658 55 9.12 फीसदी

उद्योग
स्माल पॉवर 510 574 64 12.54 फीसदी
मीडियम सप्लाई 561 626 65 11.58 फीसदी
जनरल इंडस्ट्री 561 633 72 12.83 फीसदी
पीआईयू 561 633 72 12.83 फीसदी
आर्क फर्नेस 561 633 72 12.83 फीसदी

सीजनल इंडस्ट्री (दरें पैसा प्रति यूनिट)
कैटेगरी मौजूदा दरें नई दरें कुल वृद्धि
सीजन के दौरान
एसपी 510 574 64
एमएस 561 626 65
एलएस 561 633 72
ऑफ सीजन
एसपी 603 679 76
एमएस 644 719 75
एलएस 644 727 83

आईस फैक्टरी और कोल्ड स्टोर
एसपी 510 574 64
एमएस 561 626 65
एलएस 561 633 72
आईस फेक्टरी

पब्लिक लाइटिंग 603 658 55 9.12 फीसदी
कृषि पंप सेट सरकार सरकार 7 यह पैसा सरकार ही देगी

गोल्डन टेंपल के लिए
2000 यूनिट तक मुफ्त मुफ्त
2000 यूनिट से ऊपर 467 520


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सरिया के दाम एक हजार रुपये तक बढ़ाए
इंडेक्शन फर्नेस उद्योग पर पड़ेगा 12 करोड़ का बोझ
सरकार की ओर से बिजली महंगी करते ही लोहा मार्केट में सबसे ज्यादा तेजी देखी गई। सरिया के दाम एक ही दिन में प्रति टन एक हजार रुपये तक बुधवार को बढ़ गए। उद्यमियों का कहना है कि फर्नेस उद्योग के लिए तो बिजली ही कच्चा माल है। इस इंडस्ट्री की कुल लागत में सत्तर फीसदी हिस्सा बिजली का ही है। सरकार के इस फैसले का जम कर विरोध किया जाएगा। इसके लिए रणनीति बनाने के लिए शीघ्र ही बैठक बुलाई जाएगी।
कोट
फर्नेस इंडस्ट्री में हर रोज चार सौ मैगावाट की खपत हो रही है। इससे हर फर्नेस यूनिट का खर्च भी साल में पांच लाख रुपये तक बढ़ जाएगा। सरकार के इस कदम से पंजाब के उद्यमी प्रतियोगिता से बाहर हो जाएंगे। सरकार खुद तो गोवा में चिंतन कर रही है मगर उसने प्रदेश के लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
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-केके गर्ग, प्रधान, आल इंडिया इंडक्शन फर्नेस इंडस्ट्री एसोसिएशन

लोहा बाजार गर्म
मद पहले अब
सरिया 40,500 रु/टन 41,500 रु/टन
इंगट 32,500 रु/टन 33,200 रु/टन


कोट्स
शिअद और भाजपा के नेताओं ने लगता है गोवा में बैठकर यही चिंतन किया है। उधर चिंतन शिवर खत्म हुआ और उधर पंजाब के उद्योगपतियों को बड़ा झटका दे दिया गया।
-रविंदर धीर, प्रधान, व्यापार सेना, जिला स्पोर्ट्स फोरम, जालंधर
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उद्योगपतियों के गले भी अब थक चुके हैं। सरकार हमारी बात सुनती ही नहीं। इंडस्ट्री का बुरा हाल है। लेबर रेट बढ़ चुके हैं। कमरतोड़ टैक्स सरकार ने लगा रखा है और अब बिजली की दरें भी अंधाधुंध बढ़ाई गई है। इस सरकार में अब कोई सुनने वाला नहीं।
-पूर्णिमा बेरी, एमडी, लीडर वॉल्व एंड कॉक्स
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डीजल के रेट पहले ही लगातार बढ़ रहे हैं। बिजली की दरों में भी बढ़ोतरी का यह भारी झटका कारोबारी सहन नहीं कर पाएंगे। इससे उत्पादन महंगा होगा और उद्यमी बाजार से बाहर हो जाएगा। छह माह में यह बढ़ोतरी दूसरी बार की गई है। सरकार इस फैसले पर पुनर्विचार करे।
-नरिंदर सग्गू, प्रधान, फोकल प्वाइंट एसोसिएशन, जालंधर
राज्य के उद्योगों को सरकार बर्बाद करने पर तुली: चैंबर
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कोट
सरकार के इस कदम से उद्यमियों की उत्पादन लागत बढ़ेगी। मंदी के दौर में उनके लिए जोखिम और बढ़ा दिया गया है। उद्योग जगत के लिए इस बोझ को उठा पाना मुश्किल होगा। इस वृद्धि को तत्काल वापस लिया जाना चाहिए।
-बदीश जिंदल, प्रेसिडेंट, फेडरेशन ऑफ एसोसिएशन्स ऑफ स्मॉल इंडस्ट्रीज ऑफ इंडिया (फासी)
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पॉवरकॉम का घाटा पूरा करने के नाम पर हर साल बिजली के रेट बढ़ाए जा रहे हैं। घाटा है कि कम होनी की जगह और बढ़ता ही जा रहा है। इसकी वजह इस विभाग अकुशल प्रबंधन है। लॉसेस को ठीक तरह से मैनेज किया जाए तो यह विभाग फायदे में आ जाए और लोगों पर भी बोझ नहीं पड़ेगा। सरकार उद्योग को बर्बाद न करे। विभाग के प्रबंधन पर ध्यान दे।
-अवतार सिंह, महासचिव, चैंबर ऑफ इंडस्ट्रियल ऐंड कमर्शियल अंडरटेकिंग्स
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होजरी उद्योग अगले सीजन की तैयारियां शुरू करेगा मगर सरकार ने यह नया बोझ डाल दिया है। इंडस्ट्री का पूरा गणित गड़बड़ा गया है। अब नए सिरे से प्लानिंग करनी होगी।
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-सुदर्शन जैन, प्रधान, निटवियर, अपैरल मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ लुधियाना
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एक तरफ कृषि क्षेत्र को बिजली मुफ्त दी जा रही है, वहीं आम उपभोक्ता और उद्योग जगत पर अनावश्यक बोझ डाला गया है। इस बढ़ोतरी को तत्काल वापस लिया जाए।
-राजिंदर भूषण, सीनियर प्रेसिडेंट, निटवियर क्लब, लुधियाना
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