थर्मल प्लांट बंद किए जाने के विरोध में रोष रैली
पीएसईबी इंजीनियर एसोसिएशन के ढाई सौ इंजीनियरों ने लिया भाग
अमर उजाला ब्यूरो
बठिंडा।
प्रदेश सरकार की ओर से थर्मल प्लांट बंद किए जाने के विरोध में पीएसईबी इंजीनियर एसोसिएशन ने मंगलवार को सरकार के खिलाफ रोष रैली कर विरोध जताया। इसमें करीब ढाई सौ इंजीनियरों ने हिस्सा लिया।
एसोसिएशन के अध्यक्ष संजीव सूद ने बताया कि बठिंडा थर्मल प्लांट को केंद्रीय बिजली अथॉरिटी की ओर से दी गई हिदायतों के विपरीत जाकर पंजाब सरकार ने थर्मल को बंद किया है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय बिजली अथॉरिटी की ओर से सिर्फ उन थर्मल प्लांटों को बंद करने का आदेश दिया गया था, जिनकी 100 मेगावाट से कम की समर्था है। साथ ही उसमें री-ट्रीट की सुविधा नहीं है, लेकिन बठिंडा थर्मल प्लांट में तो री ट्रीट की सुविधा भी है। इसकी समर्था 100 मेगावाट से ज्यादा है। केंद्रीय अथॉरिटी ने अपने आदेश में कहा था कि जिन प्लांटों की रिपेयर की गई है, उनको अगले दस सालों तक चलता रखा जाए। वहीं पंजाब सरकार ने केंद्रीय अथॉरिटी के आदेशों को दरकिनार कर प्लांट को बंद कर थर्मल पर खर्च किए गए 715 करोड़ रुपयों को बर्बाद कर दिया।
उन्होंने बताया कि जब थर्मल की रिपेयर की गई थी, तो उसके बाद यूनिट 1 और 2 की समय सीमा 2022 तक और यूनिट 3 व 4 की समय सीमा 2029 तक बढ़ गई थी। एसोसिएशन ने मांग की है कि रोपड़ में अल्ट्रा सुपर क्रीटिकल थर्मल प्लांट के 3 नंबर 800 मेगावाट वाले यूनिटों की उसारी तुरंत शुरू की जाए। उन्होंने बताया कि अगर सरकार ने बठिंडा थर्मल प्लांट को बंद ही करना था तो पहले रोपड़ की उक्त यूनिटों को तैयार कर लेना था। एसोसिएशन ने मांग की है कि सहायक इंजीनियरों के 18,030 रुपये के शुरुआती स्केल को पीएसपीसीएल की मैनेजमेंट बेवजह लटका रही है, जिसको पूरा किया जाए। इंजीनियर एसोसिएशन ने बताया कि सरकार ने थर्मल प्लांट को बंद लोगों की जेब पर बोझ बढ़ाया है और आने वाले धान के सीजन में किसानों को काफी मुश्किलों का सामना करना पडे़गा। इस मौके एसोसिएशन के सचिव रजिंदर भगत, केंद्रीय कार्यकारिणी कमेटी की ओर से इंजीनियर परमिंदर बांसल के अलावा अन्य पदाधिकारियों ने रैली में भाग लिया।