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किसान आत्महत्याओं पर बनी विस कमेटी ने पीएयू माहिरों से किया मंथन

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किसानों की खुदकुशी रोकने पर मंथन
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विस कमेटी ने पीएयू के अर्थशास्त्रियों एवं समाजशास्त्रियों संग की चर्चा
अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना।
सूबे में किसान आत्महत्याओं पर रिपोर्ट तैयार करने के लिए बनी विधानसभा कमेटी के सदस्यों ने सोमवार को पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) के माहिरों से मंथन किया। बैठक में पीएयू के अर्थशास्त्री एवं समाज शास्त्री मौजूद रहे। विधान सभा कमेटी के चेयरमैन एवं विधायक सुखविंदर सिंह सरकारिया, कमेटी सदस्य कुलजीत ङ्क्षसह नागरा एवं नाजर सिंह मनशाहिया ने पीएयू के वाइस चांसलर डा. बलदेव सिंह ढिल्लों, अर्थ शास्त्र विभाग के प्रमुख डा. सुखपाल समेत कई माहिरों से विभिन्न मुद्दों पर चर्चा कर यह पता लगाने का प्रयास किया कि किसान आत्महत्याएं कैसे रोकी जा सकती हैं।
वाइस चांसलर डा. ढिल्लों ने सूबे के आर्थिक विकास पर चर्चा की। उन्होंने भूमि एवं पानी स्त्रोतों, जनसंख्या एवं कृ षि पर निर्भरता पर एक नया माडल तैयार करने की सलाह दी। किसान में जागरूकता पैदा करना अनिवार्य है कि वह अपनी आमदनी और खर्च में संतुलन बनाए रखें। उत्पादन बढ़ाने की बजाए मुनाफा बढ़ाने पर फोकस करें। डा. सुखपाल ने कहा कि पिछले एक डेढ़ दशक से किसान आत्महत्याएं कर रहा है। उन्होंने इसके नुकसान पर भी प्रकाश डाला। 1990 के मध्य से लेकर हो रहे काटन की फसल के नुकसान ने किसानों को कर्ज तले दबा दिया। नतीजतन किसान आत्महत्याओं की तरफ चल पड़े।
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पंजाब में मानसा, संगरूर, बठिंडा, बरनाला जिलों में आत्महत्याएं ज्यादा हैं। वर्ष 2000 से लेकर 2015 तक 15 हजार आत्महत्याओं में से 83 फीसदी कर्ज के दबाव के चलते हुई। छोटे किसान जिनमें से 76 फीसदी के पास पांच एकड़ से कम जमीन है, वे आत्महत्याओं का शिकार हुए। आत्महत्याएं करने वालों में 43 फीसदी किसान एवं 63 फीसदी खेत मजदूर अनपढ़ हैं। कुलजीत सिंह नागरा ने कहा कि ग्रामीण लोगों को उनकी कमाई एवं खर्च के बारे में चिंतन करना होगा। इस अवसर पर डा. मनजीत कौर, डा. एमएस सिद्धू, डा. एचएस किंगरा मौजूद रहे।
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