बलिदान दिवस कल- फांसी से पहले बेखौफ थे शहीद ऊधम सिंह
फांसी के फंदे को वरमाला और मौत को शादी के रूप में देख रहेथे ऊधम सिंह
सुशील कुमार
सुनाम ऊधम सिंह वाला(संगरूर)। लंदन के केकस्टन हाल में माइकलओडवायर को मारने के बाद बैरिक्सटन जेल में रहे ऊधम सिंह को पूरा आभास था कि जल्द ही उन्हें फांसी दी जाएगी और उन्हें इसकी जरा भी परवाह नहीं थी। ऊधम सिंह फांसी से इतने बेखौफ थे कि वो फांसी के फंदे को वरमाला के रूप में देख रहे थे। जेल में रहते हुए उन्हें इस बात का मलाल भी था कि उनके मुकद्मे पर भारी पैसा खर्च हो रहा है और उन्हें बचानेकी कोशिश नहीं की जाए। उक्त जज्बात खुद ऊधम सिंह ने अपने हस्तलिखित पत्रों में जाहिर किए हैं। अंग्रेजी में लिखे इन पत्रों को पंजाबी में अनुवाद करके इस महान शहीद ऊधम सिंह के पैतृक घर में लगाया गया है और इन पत्रों को पढ़कर लोगों में देशभक्ति की भावना पैदा हो रही है। बता दें कि शहीद ऊधम सिंह को 31 जुलाई को फंदे पर लटकाया गया था। मंगलवार को इनका बलिदान दिवस देशभर में मनाया जाएगा।
फांसी का फंदा चूमने से महज पौने चार माह पहले बैरिकस्टन जेल से लंदन में मित्र शिव सिंह जौहल को लिखे पत्र में ऊधम सिंह ने कहा कि मुझे मालूम है कि जल्द ही मेरी शादी मौत से होने वाली है। मैं मौत से कभी नहीं डरा और मुझे कोई अफसोस नहीं हैं। क्योंकि मैं अपने देश का सिपाही हूं। दस वर्ष पहले मेरा दोस्त मुझे छोड़ गया था। मरने के बाद मैं उसे मिलूंगा और वह भी मेरा इंतजार कर रहा होगा। अगर आपको पता है कि मेरी मदद कौन कर रहा है तो कृपा करके उन्हें ऐसा करने से रोकें। मुझे खुशी होगी। यह पैसा जरूरतमंदों की पढ़ाई पर खर्च करें। इसके अलावा कई अन्य पत्रों में ऊधम सिंह ने उस वक्त के देश की दयनीय हालात बयां की है। इसके लिए ब्रिटिश साम्राज्यवाद को जिम्मेदार ठहराया है। शहीद ऊधम सिंह ने इन पत्रों में देश प्रेम का जज्बा कूटकूट कर भरा है। आज के नौजवानों को इस जज्बे से अवगत करवाने की जरूरत है।
फोटो:29एसजीआरपी01ए: शहीद ऊधम सिंह के हस्तलिखित पत्रों की तस्वीर।
फोटो:29एसजीआरपी01बी:सुनाम में स्थापित शहीद ऊधम सिंह की प्रतिमा।