लुधियाना में 45 फीसदी कम जली पराली
किसान बोले-सरकार सहायता करे, किसान विकल्प को तैयार
अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना।
पराली जलाने से उठने वाले धुएं से किसान भी परेशान हैं। किसान जागरूक भी हैं लेकिन उनके पास दूसरा विकल्प नहीं है। सरकार किसानों की मदद करे तो वह पूरा सहयोग देने को तैयार हैं। उधर कृषि विभाग का दावा है कि लुधियाना में पिछले साल के मुकाबले 45 फीसदी पराली कम जलाई गई है।
चीफ एग्रीकल्चर अफसर बलदेव सिंह का दावा है कि विभाग के लगातार जागरूकता प्रयासों का अच्छा असर देखने को मिल रहा है। इस साल किसानों ने कम पराली जलाई है। इसके लिए किसानों के लिए जागरूकता कैंप लगाए गए। खेतों में जाकर माहिरों ने लाइव डैमो किए। गुरुद्वारा साहिब से अनाउंसमेंट कराए गए। साथ ही बड़ी संख्या में हैप्पी सीडर एवं रोटावेटर मुहैया कराए जा रहे हैं। उनका दावा है कि कई गांवों में इस बार पराली को आग नहीं लगाई गई। उन्होंने कहा कि जिले में धान की कटाई का काम लगभग पूरा कर लिया गया है। अब गेहूं एवं रबी की अन्य फसलों की बिजाई का काम जोरों पर है।
उधर पराली से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी पूरी तरह से सक्रिय है। पीपीसीबी के चेयरमैन काहन सिंह पन्नू ने पीएयू में बैठक की और पूरी रणनीति पर मंथन किया। पीएयू के वीसी डा. बीएस ढिल्लों भी इसमें मौजूद रहे।
बैठक में मौजूद किसानों और माहिरों ने पराली की संभाल को लेकर उपयोग में आने वाली मशीनों की जरूरत व उन पर होने वाले खर्च पर चर्चा की। माहिरों ने सुझाव दिया कि कटाई करने वाली कंबाइनों के साथ सुपर स्टार मैनेजमेंट सिस्टम लगाना अनिवार्य किया जाए ताकि पराली को किसान आसानी से संभाल सके। बैठक में अगले वर्ष पराली न जलाने के लिए किसानों को जोरदार तरीके से जागरूक करने की बात की गई। इस अवसर पर कई माहिर मौजूद रहे।