डिस्को डांस और ईयरफोन आपके लिए नुकसानदायक साबित हो सकते हैं। एक सर्वे के अनुसार एक दिन में 90 मिनट से ज्यादा देर तक ईयर फोन लगा कर संगीत सुनने से सुनने की क्षमता का सीधा नुकसान हो रहा है।
चंडीगढ़ में सौ छात्रों पर किए शोध में पता चला है कि 80 तीव्रता की क्षमता से संगीत सुनने वालों की सुनने की शक्ति कम हो जाती है। डेढ़ घंटे तक संगीत सुनने का सीधा असर कानों पर पड़ता है। खतरा जब ज्यादा होता है, जब प्रतिदिन डेढ़ घंटे तक संगीत सुना जाता है।
जीएमसीएच-32 के एक डॉक्टर के अनुसार ईएंडटी डिपार्टमेंट में प्रति सप्ताह दस मरीज आते हैं। इनमें ज्यादातर यंगस्टर्स हैं। चंडीगढ़ में डिस्कोथेक जाने वाले, ईयर फोन लगाकर फोन या संगीत सुनने सुनने वाले यंगस्टर्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इसका कानों पर ही नहीं नींद पर भी असर पड़ता है।
डीजे लगाते हैं कानों में रुई
सिटी के डिस्कोथेक में काम करने वाले डीजे कानों में रुई लगाकर रखते हैं। डीजे रवि के अनुसार डिस्को में फास्ट म्यूजिक प्ले करना पड़ता है। हम कानों में हमेशा रुई लगाकर ही काम चलाते हैं। रोहित ने कहा कि बिना रुई लगाए म्यूजिक प्ले करें तो काफी दिक्कत होती है।
ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ी है जो कानों में हमेशा इयरफोन लगाए रहते हैं। इनको टिनाइटस नामक बीमारी हो जाती है। इसमें अबनॉर्मल अवाज सुनाई देती हैं। झींगुर और काक्रोच की आवाज ज्यादा सुनाई देती है।
-सुरिंदर कुमार सिंहाल, एसोसिएट प्रोफेसर, गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल
85 डेसीबल से अधिक आवाज बहरा बना सकती है
एक आम आदमी 20 हर्ट्ज से 20 हजार हर्ट्ज तक की फ्रीक्वेंसी को सुन सकता है। आवाज को डेसीबल में मापा जाता है। 85 डेसीबल या इससे अधिक आवाज आदमी को बहरा बना सकती है।
कितने डेसीबल पर क्या
- कानाफूसी - 30 डेसीबल
- आम बातचीत - 50 डेसीबल
- बार - 80-90 डेसीबल
- क्लब-डिस्को का शोर - 100-105 डेसीबल। यह शोर सिर्फ 30 मिनट तक सुरक्षित है। इसकेबाद यह सुनने की क्षमता पर असर डाल सकता है।