पंजाब में पीटीआई अध्यापकों की भर्ती में हुई अनियमितता को देखते हुए शिक्षा विभाग ने अध्यापकों की भर्ती के लिए 10 महीने पहले शुरू की गई प्रक्रिया को रद्द कर दिया है।
इसमें राष्ट्रीय माध्यमिक अभियान अथॉरिटी (रमसा) के तहत भर्ती किए जाने वाले 222 अध्यापक भी शामिल हैं।
शिक्षा विभाग की प्रधान सचिव अंजलि भंवरा ने एक आदेश जारी कर भर्ती प्रक्रिया रद्द कर दी है।
इन पदों पर भर्ती के लिए पिछले साल अक्तूबर से लेकर दिसंबर तक तीन बार विज्ञापन जारी कर भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी।
इसके तहत 222 मुख्य अध्यापकों समेत सैकड़ों अन्य पदों की भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और नियुक्ति पत्र भी तैयार हो चुके हैं और उन्हें वेबसाइट पर भी डाल दिया गया था, लेकिन आदेश आते ही वेबसाइट से इसे हटा दिया गया।
भर्ती प्रक्रिया के दौरान ही लाइब्रेरी पुस्तक और साइंस किट घोटाला सामने आने के बाद शिक्षा मंत्री सिकंदर सिंह मलूका और तत्कालीन डीजीएसई केएस पन्नू के बीच विवाद खड़ा हो गया, लिहाजा यह भर्ती प्रक्रिया बीच में लटक गई है।
मलूका ने डीजीएसई के अधीन सभी कमेटियों को भंग कर दिया था, लिहाजा इसके चलते इन पदों पर भर्ती करने वाली कमेटी भी भंग हो गई।
मुख्य अध्यापक पद पर चुने गए 222 अध्यापकों ने आरोप लगाया है कि शिक्षा मंत्री मलूका और तत्कालीन डीजीएसई पन्नू के बीच विवाद के चलते उनकी नियुक्तियां नहीं हो पा रहीं थी और अब विभाग ने इस प्रक्रिया को ही रद्द कर दिया है।
मालूम हो कि शिक्षा मंत्री पहले ही कह चुकेहैं कि भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी और इसमें कई कमियां थीं। उन्होंने कहा कि गड़बड़ी और कानूनी चुनौतियों के कारण इस भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर नई कमेटी गठित की जाएगी और भर्ती बोर्ड की देखरेख में यह प्रक्रिया पूरी होगी।