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Shiromani Akali Dal: विधायक मनप्रीत अयाली ने उठाई बगावत की आवाज, अकाली दल के दिग्गज नेताओं ने साधी चुप्पी

Thu, 21 Jul 2022 03:59 PM IST
निवेदिता वर्मा सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)

सार

अकाली दल के सीनियर उपाध्यक्ष मंजीत सिंह भूराकोहना का कहना है कि पार्टी अपने सिद्धांतों से भटक चुकी है और सत्ता का सुख भोगने की लालसा लेकर बैठी है। अकाली दल की लीडरशिप को त्याग की भावना रखनी चाहिए और पद छोड़ देना चाहिए। 
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मनप्रीत अयाली। - फोटो : फाइल
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विस्तार
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पंजाब में शिरोमणि अकाली दल में विधायक मनप्रीत सिंह अयाली की आवाज और मांग को लेकर अकाली दल के तमाम नेताओं ने चुप्पी साध ली है। हालांकि पहले कोई भी नेता बादल परिवार के खिलाफ आवाज उठाता था तो अकाली दल के दिग्गज फ्रंट खोल देते थे और पूरा पोस्टमार्टम करते थे। यह पहली बार है कि मनप्रीत अयाली ने खुलेआम अकाली दल की लीडरशिप को चुनौती दी और उसके खिलाफ किसी नेता ने एक शब्द तक नहीं बोला। उल्टा मनप्रीत सिंह अयाली को पार्टी में समर्थन मिलना शुरू हो गया है, जिससे पार्टी सुप्रीमो सुखबीर बादल असहज हो गए हैं। जिस तरह से पार्टी के भीतर सन्नाटा पसर गया है, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि आगामी दिनों में अकाली दल में बड़ा विस्फोट हो जाए। 

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उल्टा पार्टी के सीनियर वाइस प्रधान व एसजीपीसी सदस्य मंजीत सिंह भूरा कोहना ने मनप्रीत सिंह अयाली की लाइन पकड़ ली है। इससे पहले दो बार विधायक रहे गुरप्रताप सिंह वडाला ने भी मनप्रीत अयाली को सही करार देकर सुखबीर बादल के लिए परेशानी खड़ी कर दी थी। अब अकाली दल के सीनियर उपाध्यक्ष मंजीत सिंह भूराकोहना का कहना है कि पार्टी अपने सिद्धांतों से भटक चुकी है और सत्ता का सुख भोगने की लालसा लेकर बैठी है। अकाली दल की लीडरशिप को त्याग की भावना रखनी चाहिए और पद छोड़ देना चाहिए। 

विधायक मनप्रीत सिंह अयाली, पूर्व विधायक गुरप्रताप सिंह वडाला और अब मंजीत सिंह भूराकोहना की आवाज अकाली दल में बेशक गूंज रही है लेकिन इसको काउंटर करने वाला कोई नहीं है। हालांकि इससे पहले अकाली दल के नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा, राज्यसभा सदस्य बलविंदर सिंह भूंदड़, प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा हमेशा फ्रंट फुट पर आकर अकाली दल बादल परिवार की हिमायत में खड़े हो जाते थे लेकिन यह पहली बार है कि बादल परिवार की खुलेआम हिमायत करने वाला कोई नेता आगे नहीं आ रहा है। दरअसल, मनप्रीत सिंह अयाली व गुरप्रताप सिंह वडाला वह नेता हैं, जो इकबाल सिंह झूंडा कमेटी के सदस्य हैं। इस कमेटी का गठन अकाली दल की तरफ से किया गया था, जिसका मकसद अकाली दल की करारी हार के कारणों का पता लगाना और पार्टी को सिफारिश कर लागू करवाना था। पार्टी ने 117 में से महज तीन सीट ही जीती हैं, जिससे पार्टी के वर्करों व नेताओं का मनोबल बुरी तरह से टूटा है। ऐसे में इकबाल सिंह झूंडा कमेटी की रिपोर्ट पार्टी के पास तो आ चुकी है लेकिन उसको सार्वजनिक नहीं किया गया है। 
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अगर यह रिपोर्ट खुल जाती है तो अकाली दल के सुप्रीमो सुखबीर सिंह बादल के आगे का रास्ता आसान नहीं होगा। दरअसल, यह पहली बार है कि पिता के बाद अकाली दल की कमान उनके बेटे सुखबीर बादल के हाथ है। वरना 101 वर्ष के इतिहास में अकाली दल के प्रधान बदलते रहे हैं और पार्टी में हर बार नया चेहरा सामने आता रहा है। पार्टी की तरफ से 23वें प्रधान सुखबीर बादल हैं।

101 वर्षों में प्रधानों की सूची...

1. सरमुख सिंह झब्बाल
2. बाबा खड़क सिंह
3. करम सिंह बस्सी
4. मास्टर तारा सिंह
5. गोपाल सिंह कौमी
6. तारा सिंह
7. तेजा सिंह
8. बाबू लाभ सिंह
9. ऊधम सिंह नागोके
10. ज्ञानी करतार सिंह
11. प्रीतम सिंह गोजरा
12. हुकम सिंह
13. संत फतेह सिंह 
14. अच्छर सिंह
15. भूपेंदर सिंह
16. मोहन सिंह तूड़
17. जगदेव सिंह तलवंडी
18. हरचंद सिंह लोंगोवाल
19. सुरजीत सिंह बरनाला
20. सिमरजीत सिंह मान
21. प्रकाश सिंह बादल
22. सुखबीर सिंह बादल

2015 के बाद से सुखबीर की चल रही है उल्टी गिनती...

पंजाब पूरे देश में एकमात्र ऐसा राज्य है जिसका बंटवारा भाषा के आधार पर हुआ। राजसी तौर पर जीवित रहने के लिए अकाली दल ने आंदोलन किया। 1966 में पंजाब का विभाजन हुआ। तब से लेकर आज तक अकाली दल में कई बार विभाजन का दौर देखा, कई बार अकाली दल टूटा, लेकिन अकाली दल में कभी भी विश्वास का संकट नहीं उत्पन्न हुआ। अब अकाली दल के भीतर जबरदस्त रोष फैल रहा है। 

पार्टी के तीन विधायक हैं और उनके नेता मनप्रीत सिंह अयाली ने ही मोर्चा खोल दिया है। अक्तूबर 2015 में पंजाब में श्री गुरुग्रंथ साहिब की बेअदबी के बाद अकाली दल पर अविश्वास के बादल मंडराने लगे। बेअदबी कांड के बाद पंथक वोट बैंक टूटता चला गया। पंथक वोट बैंक को बचाए रखने के अकाली दल के सारे प्रयास व्यर्थ साबित हुए। 2017 के विधानसभा चुनाव में अकाली दल हाशिये पर आ गई। चुनाव में अकाली दल को मात्र 15 सीटें ही मिली। अब 2022 में महज तीन सीट ही मिली, जिसमें एक सीट पर बिक्रम सिंह मजीठिया की पत्नी चुनाव जीती हैं जबकि दोआबा में डॉ. सुखविंदर सुक्खी  और मालवा की 69 सीटों में अकाली दल को महज एक सीट मनप्रीत सिंह अयाली की मिली है।

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