सोमवार को एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम में चंडीगढ़ में शिअद और कांग्रेस ने एक दूसरे पर कई गंभीर आरोप जड़ दिए।
पंजाब कांग्रेस के प्रवक्ता खैहरा ने जहां सीपीएस एनके शर्मा पर 25 करोड़
की जमीन खरीद में 4.5 करोड़ रुपये के स्टांप ड्यूटी चोरी का आरोप लगाया।
वहीं इस पर पलटवार करते हुए सीपीएस शर्मा ने कहा कि बाजवा और खैहरा ने करोड़ों की संपत्ति कैश पेमेंट देकर खरीदी है। जबकि नियमत: 20 हजार से ज्यादा रकम का लेनदेन कैश में नहीं किया जा सकता है।
प्रदेश कांग्रेस ने मुख्य संसदीय सचिव एवं शिअद के कोषाध्यक्ष एनके शर्मा पर जमीन खरीद में स्टांप ड्यूटी की चोरी का आरोप लगाते हुए जमीन सौदे की सीबीआई जांच की मांग की है।
प्रदेश प्रवक्ता खैहरा ने कहा कि समूचे पंजाब में इस तरह से हर रोज करोड़ों रुपये की स्टांप ड्यूटी की चोरी कर शिअद अपना खजाना भर रहा है। चुनाव में इसी धन का इस्तेमाल कर शिअद सियासी भ्रष्टाचार को बढ़ावा दो रहा है।
खैहरा ने शर्मा के इस्तीकेकी मांग करते हुए सीबीआई या फिर कैग से जांच की मांग की।
संवाददाताओं से बातचीत करते हुए खैहरा ने कहा कि शर्मा की बीएन शर्मा बिल्डर प्राइवेट लिमिटेड ने जीरकपुर स्थित गांव बिशनपुरा में 13 मार्च 2013 में 11 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री 25 करोड़ रुपये में करवाई।
रजिस्ट्री केमुताबिक खरीद केवक्त जमीन कृषि योग्य भूमि थी जबकि फर्द गिरदावरी में बताया गया है कि यहां फ्लैट का निर्माण हो रहा है। इस सौदे में दो करोड़ की स्टांप ड्यूटी जमा कराई गई।
खैहरा ने आरोप लगाया कि रजिस्ट्री के वक्त जमीन पर 650 फ्लैट बन चुके थे। बेसिक वैल्यू मास्टर के मुताबिक रेसिडेंशियल एरिया का रेट 15,500 रुपये प्रति वर्ग गज है। शर्मा ने राजस्व विभाग केअधिकारियों की मिलीभगत से इस सौदे में सरकार को 4.5 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी का चूना लगाया।
खैहरा ने आरोप लगाया कि 25 करोड़ रुपये की जमीन पर बैंक ने 60 करोड़ का लोन दिया, यह भी आश्चर्य का विषय है।
खैहरा ने आरोप लगाया कि समूचे पंजाब में हर रोज सरकार में बैठे लोग करोड़ों रुपये की स्टांप ड्यूटी चोरी कर सरकार को चूना लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह लोग शिअद का खजाना भर रहे हैं और चुनाव में इसी धन का उपयोग किया जाता है।
माफी किस बात ही मानहानि का केस करें शर्मा: खैहरा
प्रदेश प्रवक्ता सुखपाल खैहरा ने एनके शर्मा के आरोपों को नकारते हुए कहा कि वह किसी कीमत पर माफी नहीं मांगेगे शर्मा चाहें तो मानहानि का केस कर दें। खैहरा ने कहा शर्मा जिस 13 कनाल 9 मरले जमीन की रजिस्ट्री को लेकर वह आरोप लगा रहे हैं, यह जमीन गैरउपजाऊ (वीरानी) है और उस समय जमीन का यही रेट था। उन्होंने खुद और शर्मा दोनों के जमीन सौदों की किसी भी निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराने को कहा है।
शर्मा का पलटवार, बाजवा परिवार जमीन घोटाले में लिप्त
चंडीगढ़। पंजाब के मुख्य संसदीय सचिव एवं शिअद के कोषाध्यक्ष एन.के. शर्मा ने सोमवार को उन पर लगाए आरोपों का जवाब देने के साथ जोरदार पलटवार करते हुए प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा, उनके परिवार और खैहरा पर जमीन घोटाले में लिप्त होने के आरोप जड़ दिए।
उन्होंने कहा कि खैहरा द्वारा लगाए आरोप निराधार हैं और यदि खैहरा ने मंगलवार शाम पांच बजे तक सार्वजनिक तौर पर माफी नहीं मांगी तो वे मानहानि का मुकदमा दायर करेंगे। वे खुद मुख्यमंत्री बादल से मिलकर आग्रह करेंगे कि खैहरा के आरोपों और बाजवा परिवार एवं खैहरा के खिलाफ लगे आरोपों की जांच एक ही निष्पक्ष एजेंसी से करवाई जाए।
चंडीगढ़ प्रेस क्लब में शर्मा ने आरोप लगाया कि प्रताप बाजवा, उनका परिवार और खैहरा मिलकर रियल इस्टेट का बिजनेस कर रहे हैं। फतेह जंग सिंह बाजवा की पत्नी हनीला बाजवा ने 9 बीघे 12 बिसवे जमीन मुल्लांपुर के पास भड़ौजियां गांव में 5 जुलाई 2011 को 3 करोड़ 13 लाख 60 हजार रुपये की बेची थी।
इसी खसरा नंबर में आती 25 एकड़ (108 बीघा 3 बिसवा) जमीन केवल दो महीनों के बाद (9 सितंबर 2001) प्रताप सिंह बाजवा और उसकी पत्नी चरनजीत कौर बाजवा की कंपनी पीसीबी रियल इस्टेट लिमिटेड के जरिए महज 2 करोड़ 98 लाख 60 हजार रुपये की खरीद ली।
हैरानी की बात यह है कि संबंधित कंपनी पांच महीने पहले ही रजिस्टर्ड हुई है और उसकी अधिकृत पूंजी एक लाख रुपये दिखाई गई है। यह पूरी पेमेंट चेक या ड्राफ्ट के जरिए नहीं बल्कि कैश की गई है।
जबकि आयकर के मुताबिक बीस हजार से ज्यादा की पेमेंट नकद नहीं की जा सकती है। अभी तक इस कंपनी की बैलेंस सीट कभी भी रजिस्ट्रार कार्यालय में नहीं पहुंची।
शर्मा ने आरोप लगाया कि सुखपाल खैहरा ने बाजवा के भाई फतेह जंग से चंडीगढ़ के नजदीक करोड़ा गांव में 26 मई 2010 को 13 कनाल नौ मरले जमीन खरीदी थी। इसकी पेमेंट भी कैश ही की गई है और यह 52 लाख के डीसी रेट पर ही करवाई गई।
अपने पर लगे आरोपों का जवाब
शर्मा ने कहा कि उन्होंने 9 बीघा जमीन का कांसेंट लैटर जमीन मालिकों से लिया था। इसके लैंड यूज, ईडीसी आदि के पूरे चार्ज उनकी कंपनी ने दी। इस पर फ्लैट बनाए जा रहे हैं। 13 मार्च 2013 की इसकी रजिस्ट्री करवाई गई।
उस वक्त 2.30 करोड़ रुपये प्रति एकड़ कलेक्टर रेट था, लेकिन कलेक्टर रेट से भी ज्यादा की रजिस्ट्री करवाई गई। पूरा पैसा चेक के जरिए दिया गया है।
कोई एक एजेंसी करें दोनों जांच
किसी भी एजेंसी से जांच को तैयार हैं लेकिन वे मुख्यमंत्री से अनुरोध करेंगे कि उनकी और कांग्रेस नेताओं की जांच एक ही एजेंसी से करवाई जाए।
कांग्रेस नेता ने ही दिए हैं कागजात
शर्मा ने दावा किया कि किसी कांग्रेस नेता ने ही उनको प्रताप सिंह बाजवा और उनके परिवार के कथित जमीन घोटाले संबंधी कागजात दिए हैं। ऐसे ही और खुलासे वे प्रत्येक सप्ताह करने का प्रयास करेंगे।
उन्होंने किसी का नाम लेने से इनकार कर दिया।