गैरकानूनी हथियारों का नया निर्माण केंद्र
मध्य प्रदेश के नक्शे पर उमेरती, बरिया, सिंगनोर और खरगौन नामक जगह किसी समय तक अनजान ही हुआ करती थीं। देसी कट्टे बनाने के लिए अब तक बिहार का मुंगेर और उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद, अलीगढ़ और मेरठ ही बदनाम थे, जहां यह कारोबार कुटीर उद्योग का रूप ले चुका था। लेकिन पिछले कुछ वर्ष के दौरान कई हथियार तस्करों की गिरफ्तारी ने केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों को यह मानने को बाध्य कर दिया है कि देश में गैरकानूनी हथियारों का एक नया निर्माण केंद्र अस्तित्व में आ चुका है।
सिकलीगर बनाते हैं पिस्ताैल
पंजाब में बरामद इन पिस्तौलों के निर्माता अधिकतर सिकलीगर हैं। यह सिखों का लोहार समुदाय है जो परंपरागत रूप से चाकू, तलवारें और बंदूकें बनाने में माहिर है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस अवैध धंधे में इस समुदाय के करीब दो से तीन सौ परिवार संलिप्त हैं, जो हर माह एक हजार के करीब पिस्तौलें बनाते हैं। जहां देसी कट्टे की कीमत 7 से 10 हजार रुपये के बीच है। वहीं 32 बोर की 25 हजार व 30 बोर की 40 हजार रुपये में एमपी से मिलती हैं।
पुलिस अधिकारी बताते हैं कि पहले वे सिर्फ चाकू और तलवारें बनाते थे, बाद में देसी पिस्तौल भी बनाने लगे। पुलिस ने बरामद हथियारों की जांच की तो पाया कि इंदौर के दक्षिण में स्थित उमेरती गांव, जहां सिकलीगरों की अच्छी-खासी आबादी है, अवैध हथियारों के निर्माण का केंद्र माना जाता है। उमेरती महाराष्ट्र की सीमा पर स्थित है, जहां अनियार नदी दोनों राज्यों के बीच सरहद का काम करती है। बरिया से भी देसी कट्टा तैयार होकर आ रहे हैं। वहीं, 32 बोर की पिस्तौल खरगोन के सिग्नूर गांव भी ज्यादा बदनाम है।
बदलते समय के साथ अवैध हथियारों का निर्माण एवं सप्लाई करने वाले भी हाइटेक हो गए हैं। पुलिस से बचने के लिए हथियारों का धंधा सोशल मीडिया के जरिए हो रहा है। सोशल मीडिया पर फोटो भेजकर सौदेबाजी की जा रही है। सौदा तय होने के बाद हथियारों की डिलीवरी भी बताए पते पर करने के लिए रुपयों का लालच देकर युवाओं को कुरिअर बॉय की तरह उपयोग किया जा रहा है।
पुलिस की तहकीकात में मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले के खकनार जनपद का पाचोरी गांव का नाम भी आया है। मप्र-महाराष्ट्र सीमा की सतपुड़ा पहाड़ी के जंगल में बसे पाचोरी गांव में 124 परिवार के करीब 920 से अधिक लोग निवास करते हैं। 50 से अधिक आपराधिक तत्व के लोगों पर हथियार सप्लाई करने के प्रकरण दर्ज है। पिस्टल, रिवाल्वर और कट्टे बनाने वाले अब गोलियां तक बनाने लगे हैं।