ऐतिहासिक युद्ध खेमकरण सेक्टर के असल उत्तर क्षेत्र में लड़ा गया। भारतीय सेना ने पैटन टैंकों से लैस पाकिस्तानी सेना का सामना किया। सैनिकों ने भूभाग का उपयोग कर सुनियोजित रक्षात्मक रणनीति अपनाई।
वज्र कोर ने 09 सितंबर 2026 को असल उत्तर युद्ध (1965) के वीर भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। यह समारोह असल उत्तर युद्ध स्मारक पर आयोजित किया गया। 1965 के भारत-पाक युद्ध में भारतीय सैनिकों ने पाकिस्तान के शक्तिशाली बख्तरबंद आक्रमण को निर्णायक रूप से परास्त किया था।
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यह ऐतिहासिक युद्ध खेमकरण सेक्टर के असल उत्तर क्षेत्र में लड़ा गया। भारतीय सेना ने पैटन टैंकों से लैस पाकिस्तानी सेना का सामना किया। सैनिकों ने भूभाग का उपयोग कर सुनियोजित रक्षात्मक रणनीति अपनाई। उन्होंने दुश्मन को भारी क्षति पहुंचाई।
तीन दिनों के भीषण संघर्ष के बाद यह क्षेत्र नष्ट हुए पाकिस्तानी पैटन टैंकों के कारण ''पैटन नगर'' कहलाया। इस विजय ने पाकिस्तान की आक्रामक योजना को विफल किया। यह भारतीय सेना की रणनीतिक सूझबूझ का प्रदर्शन था।
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अब्दुल हमीद का बलिदान और समारोह
इस युद्ध के महानायकों में कंपनी क्वार्टर मास्टर हवलदार अब्दुल हमीद का नाम प्रमुख है। उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। उन्होंने दुश्मन के टैंकों का सामना करते हुए अपनी रिकॉइललेस गन से वीरता दिखाई। वह भीषण गोलाबारी के बीच अंतिम क्षण तक लड़ते रहे। उनका सर्वोच्च बलिदान आज भी भारतीय सैनिकों को प्रेरित करता है। श्रद्धांजलि समारोह में पूर्व सैनिकों, सेवारत सैन्यकर्मियों और स्थानीय ग्रामीणों ने शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित किए। वज्र कोर ने असल उत्तर के वीरों की विरासत को संरक्षित रखने का संकल्प दोहराया।