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Jalandhar News: हिमाचल की कांगड़ा घाटी में फिर सुनेगी छुक-छुक की आवाज

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पठानकोट-नैरोगेज रेलवे पुल का निर्माण जून के अंत तक होगा पूरा
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सूरज प्रकाश। पठानकोट



हिमाचल की कांगड़ा घाटी में जून के बाद फिर ट्रेन की छुक-छुक की आवाज सुनाई देगी क्योंकि कांगड़ा घाटी में ट्रेन पठानकोट-नूरपुर-कांगड़ा-बैजनाथ, पपरोला से नैरोगेज तरफ दाैड़नी शुरू हो जाएगी। रेवले पुल का काम कंपनी जून के अंत तक खत्म कर देगी।

चक्की खड्ड पर बना अंग्रेजों के जमाने का रेलवे पुल पानी के तेज बहाव में अगस्त 2022 को बह गया था। जनवरी 2023 में पुल का पुन: निर्माण शुरू हुआ। इसी साल पुल का कार्य पूरा होगा। रेलवे विभाग ने पठानकोट से डलहौजी रोड तक और नूरपुर रोड से जोगिंद्र नगर तक रेल चलाने की योजना भी बनानी शुरू कर दी है।
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पुल के कार्यकारी इंजीनियर रंजीत ने बताया कि पुल पर अभी नैरोगेज ही दाैड़ेगी, लेकिन इसका डिजाइन ब्राडगेज के हिसाब से रखा गया है और स्लीपर सीटिंग भी ब्राडगेज के हिसाब की गई है। कांगड़ा तक ब्राडगेज करने के लिए सर्वे हो गया है और कुछ करव अभी रुकावट बन रहे हैं। भविष्य में अगर ब्राडगेज ट्रेन भी चलती है तो स्लीपर को इस भांति माॅडिफाई किया गया है कि उस पर नैरोगेज और ब्राडगेज की भी फिटिंग हो जाएगी। इस नई रेल लाइन में अब यह खास ध्यान रखा गया है। जून के अंत तक पुल को पूरी तरह से तैयार करना उनका लक्ष्य है। 1 जुलाई को कंपनी पुल रेलवे विभाग को समर्पित कर देगी। इसी बीच ट्रायल भी हो जाएगा। पुल की मजबूती का ध्यान 100 साल तक रखा गया है। पुराना रेलवे पुल सन् 1926 में बना था।

घाटी में लंबे समय से बंद हैं रेल सेवाएं



कांगड़ा घाटी में रेलवे पठानकोट-नूरपुर-कांगड़ा-बैजनाथ पपरोला से नैरोगेज रेल संपर्क उपलब्ध करवाता है। घाटी में लंबे समय से रेल सेवाएं बंद पड़ी हैं, जिन्हें अब बहाल करने की योजना बनाई जा रही है। चक्की खड्ड में बाढ़ आने से रेलवे पुल के पिल्लर नंबर-3 में दरारें आ गई थी। सुरक्षा को देखते हुए विभाग ने पुल बंद कर दिया था। 20 अगस्त को दोबारा चक्की खड्ड में आई बाढ़ रेलवे पुल को बहा ले गई। इसके साथ ही रेलवे ट्रैक पर जगह-जगह भूस्खलन से भी काफी नुकसान हुआ। पुल नंबर-32 को घाट-1 से घाट-8 तक को छोड़कर व्यापक नुकसान हुआ है। केवल जोगिंद्रनगर की ओर से घाट-9 से एबटमेंट तक अप्रभावित रहा है।
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50 मीटर नीचे तक पिल्लर लगाए



पुल के निर्माण में करीब 40 करोड़ रुपये खर्च आया है। इसके पिल्लरों की गहराई 50 मीटर तक नीचे रखी गई है, जो पहले से ज्यादा है। स्थानीय लोगों की मानें तो अंग्रेजों के जमाने का बना पुल गिरने की दूसरी वजह चक्की खड्डे में अवैध खनन बना। माफिया ने चक्की खड्ड इतनी गहराई तक खोद दी है कि अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। खनन माफिया पर न तो पंजाब सरकार और न ही हिमाचल सरकार अंकुश लगा पाई है। वहीं, इस पुल पर ट्रेन सुविधा दोबारा शुरू होने से पठानकोट के व्यापारियों को भी फायदा होगा।
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