संवाद न्यूज मोगा
भारतीय महिला क्रिकेट टीम की विश्वकप में ऐतिहासिक कामयाबी ने लड़कियों को इस खेल के लिए बहुत प्रेरित किया है। कप्तान हरमनप्रीत कौर के गांव दुनेका में अब वर्षों से चला आ रहा नारा भी बदल गया है। अभी तक लोग यहां कहते थे बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ लेकिन हरमनप्रीत के संघर्ष और जीत ने इस नारे को एक नया रूप दिया है- बेटी बचाओ, बेटी को खिलाओ।
हरमनप्रीत ने अपने साहस और मेहनत से यह साबित कर दिया है कि एक छोटे से गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचना भले ही मुश्किल हो लेकिन नामुमकिन नहीं है। हरमन ने कठिन परिश्रम, अनुशासन और आत्मविश्वास के दम पर यह कर दिखाया। बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद की बहन एवं समाजसेवी मालविका सूद ने भी मोगा की बेटियों के लिए प्रेरणादायक भूमिका निभाई है। उन्होंने लंबे समय से समाजसेवा के साथ-साथ गरीब परिवारों की लड़कियों की शिक्षा में मदद कर उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दिया। मालविका सूद का कहना है कि आज की बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। वो आईएएस-आईपीएस अफसर बन रही हैं। भारतीय सेना में भी लड़कियां देश का गौरव बढ़ा रही हैं। हरमनप्रीत जैसी बेटियां मोगा और पूरे देश के लिए गर्व का प्रतीक हैं। हरमनप्रीत की इस ऐतिहासिक सफलता ने न केवल मोगा बल्कि पूरे भारत का सिर गर्व से ऊंचा किया है। उनकी कहानी उन सभी माता-पिताओं के लिए संदेश है जो बेटियों को आगे बढ़ने से रोकते हैं। हरमन के माता-पिता ने समाज की बातों को नजरअंदाज कर बेटी को खेलने का मौका दिया और आज वही बेटी अपने माता-पिता का नाम पूरे दुनिया में ऊंचा कर दिया। सूद फाउंडेशन ने हरमनप्रीत कौर एवं उनके माता-पिता को इस सफलता के लिए बधाई दी है।