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सिविल अस्पताल में महिला के गर्भ में बच्चे की मौत

Sun, 03 Jan 2016 07:06 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जालंधर
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सिविल अस्पताल की लापरवाही से रविवार को डिलीवरी के लिए आई 9 माह की गर्भवति सुनीता के पेट में ही बच्चे की मौत हो गई।
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सुनीता के परिजनों ने आरोप लगाया है कि अस्पताल के डॉक्टरों ने सुनीता का ठीक ढंग से इलाज नहीं किया। इस वजह से उनके बच्चे की मौत हुई है।

इसके बाद करतारपुर के रहने वाले सुनीता के पति रमेश कुमार और उसके परिजनों ने अस्पताल परिसर में खूब हंगामा किया।

रमेश कुमार का कहना था कि जब रविवार सुबह एक महिला डॉक्टर को फोन कर आपरेशन के लिए बुलाया गया तो उसने यह कह कर साफ इंकार कर दिया कि छुट्टी के दिन नहीं आएंगी।

उन्होंने कहा कि उसकी पत्नी काफी कमजोर थी, इस पर डॉक्टरों ने कहा था कि उसका सीधा ऑपरेशन करवाकर डिलीवरी करवा देना। वह शनिवार को अपनी पत्नी को सिविल अस्पताल ले आए।
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शनिवार रात भर उनकी पत्नी को दर्द हुआ। सुबह अस्पताल ने बाहर से स्कैन करवाने भेज दिया। पहले तो डॉक्टर आपरेट करने की बात कर रहे थे, जबकि बाद में नार्मल डिलीवरी करने के लिए दबाव बनाने लगे।

डॉक्टरों की इस लापरवाही के दौरान सुनीता का दर्द काफी बढ़ गया। उन्होंने कहा कि सिविल अस्पताल के अन्य डाक्टर भी मदद करने के लिए नहीं आए। ऐसे में सुनीता के पेट अंदर ही बच्चे ने दम तोड़ दिया।

सिविल अस्पताल के उच्च अधिकारी स्टाफ डाक्टर का बचाव करने में ही लगे रहे। अस्पताल की एसएमओ संगीता का कहना है कि मरीज को 1 जनवरी को बुलाया गया था, लेकिन उसे 2 जनवरी को लाया गया।
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इसके अलावा मरीज को दौरे भी पड़ते थे, जिसके बारे में उन्हें नहीं बताया गया। अस्पताल की एमएस वीना पाल का कहना है कि वे सोमवार को इस मामले की जांच करेंगे।

जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। सिविल सर्जन कैलाश कपूर का कहना है कि मामला उनके ध्यान में नही आया है।
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