कोरोना को लेकर अफवाहों का बाजार गर्म है। दिल्ली निजामुद्दीन के तब्लीगी जमात में पठानकोट के मामून निवासी व्यक्ति के शामिल होने की अफवाह फैल गई। मामून निवासी अब्दुल मजीद को कोरोना संक्रमित बताया गया और उससे 5 मीटर की दूरी बनाए रखने के पूरे गांव में पोस्टर लगा दिए गए। अफवाह और पोस्टरों से अब्दुल खासा परेशान है।
बकौल अब्दुल, वह दिल्ली में निजामुद्दीन के तब्लीगी जमात में गया ही नहीं था। उसने सुजानपुर के गांव फूल प्यारा निवासी व्यक्ति को अपने प्रूफ पर सिम खरीदकर दिया था, वहीं जमात में गया था और अब दिल्ली में आइसोलेट किया गया है। निजामुद्दीन जमात में हिस्सा लेने वालों की जारी लिस्ट में अब्दुल मजीद का नाम था। इसे देखकर ग्रामीणों ने उसके नाम के पोस्टर बनाए और लोगों को उससे दूरी बनाए रखने के लिए आगाह किया।
अब्दुल ने बताया कि गांव के लोगों द्वारा दिखाई गई सामाजिक हीनभावना से वह काफी परेशान है। वह जमात में गया नहीं तो उसके पोस्टर क्यों लगाए गए। उसने कहा कि जमात में शामिल लोगों की लिस्ट में उसका नाम कैसे आया, उसे इस बारे में भी जानकारी नहीं है। मजीद ने बताया कि फूलप्यारा निवासी व्यक्ति का प्रूफ रिजेक्ट हो गया था, जिसके चलते उसने अपना प्रूफ देकर उसका सिम शुरू करवाया।
अब सभी चिट्ठियां मेरे नाम की निकल रही हैं। पुलिस, सीआईडी समेत कई लोग उससे पूछताछ करने आ रहे हैं। मजीद ने कहा कि पुलिस जांच में सामने आया है कि वह नहीं बल्कि फूल प्यारा का व्यक्ति तब्लीगी जमात में गया था। उसके बावजूद गांव में पोस्टर लगे हैं। लोग हीनभावना से देखते हैं।
अब्दुल मजीद दिल्ली नहीं गया था। गलतफहमी में लोगों ने पोस्टर लगवा दिए थे, मामला संज्ञान में आते ही पोस्टर उतरवा दिए गए हैं।
- अनीता ठाकुर, एसएचओ, मामून