किसानों के हकों के लिए फिर से धरने-प्रदर्शन करने पड़े तो पीछे नहीं हटेंगे। प्रशासन जत्थेदारों के हाथों कठपुतली बन कर काम कर रहा है। सफेद मक्खी से प्रभावित छोटे किसान मुआवजे से वंचित हैं। यह बातें प्रदेश कांग्रेस के उपप्रधान व विधायक सुनील जाखड़ ने गांव तेलूपुरा (अबोहर) में मंगवार के पत्रकारों से वार्ता के दौरान कहीं।
जाखड़ ने कहा कि पहले नरमा का मुआवजा बांटने में भी बड़े पैमाने पर भेदभाव किया गया अब मूंगी, ग्वार उत्पादक किसानों के साथ भी भेदभाव किया जा रहा है। सरकार की गलत नीतियों के चलते छोटे व गरीब किसान खेती छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। मालवा में किसानों की खुदकुशी के मामले लगातार बढ़ रहे है।
जाखड़ ने कहा कि जब किसानों को मुआवजा राशि जारी करने के लिए पंजाब सरकार पर दबाव बनाया तो दबाव में आकर सरकार ने फाजिल्का जिले का 44.50 करोड़ रुपए जारी तो कर दिए 12 दिन बीत जाने के बाद भी ज्यादातर किसानों को मुआवजा राशि नहीं मिली। इतना ही नहीं ज्यादातर गांवों में ऐसे किसानों का सर्वे लिस्ट में नाम ही नहीं लिखा गया जो सफेद मक्खी के प्रकोप से प्रभावित हुए थे।
जाखड़ ने कहा कि पहले सरकार से मुआवजा राशि जारी करवाने के लिए धरने-प्रदर्शन करने पड़े थे, अब उन्हें लगता है कि गरीब किसानों को हक दिलवाने के लिए प्रशासन पर दबाव बनाना पड़ेगा। उन्होंने जिला प्रशासन को चेताते हुए कहा कि समय रहते वह प्रभावित किसानों की सुध लेकर उन्हें मुआवजा राशि जारी करे।
जाखड़ ने ग्रामीणों को कहा कि अकाली-भाजपा नेता गरीबों के राशन कार्ड बनाने में भी भेदभाव कर रहे हैं। गरीबों को पिछले तीन साल से सस्ती दाल नहीं मिली।इलाके में सेम समस्या लगातार बढ़ रही है। सेम के कारण किसानों के बाग सूख रहे है। इन सभी समस्याओं के हल के लिए पंजाब सरकार की आंखें खोलने के लिए एक योजनाबद्ध तरीके से आंदोलन चलाने होंगे।