केंद्र सरकार की बैंकिंग रिफार्म नीति के खिलाफ यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियन के आह्वान पर शुक्रवार को बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों ने कामकाज बंद रखा। जालंधर में एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल के तहत करीब तीन सौ और पूरे जिले करीब 800 बैंक शाखाओं में काम ठप रहा। इस वजह से करोड़ों रुपये का बैंकिंग कारोबार एक दिन के लिए रुक गया।
विभिन्न बैंकों के लगभग दो हजार अधिकारियों और कर्मचारियों ने इकट्ठा होकर स्थानीय स्टेट बैंक आफ इंडिया की मुख्य शाखा से पीएनबी चौक नेहरू गार्डन तक रोष रैली निकाली। बैंक यूनियनें नई नीति के तहत बैंकों के निजीकरण, बैंकों में सीधे विदेशी निवेश और कारपोरेट हाउसेज को लाइसेंस दिए जाने का विरोध कर रही हैं।
इस दौरान यूएफबीयू के कनवीनर अमृत लाल ने कहा कि सरकार बैंकों के निजीकरण की आड़ में आम लोगों की 116 लाख करोड़ रुपये की बचत राशि कारपोरेट घरानों के हाथ सौंपने की साजिश कर रही है। एनसीबीई (पंजाब चंडीगढ़) के वरिष्ठ उपाध्यक्ष आरके गुप्ता ने कहा कि बैंकों में 8167 ऐसे डिफाल्टर हैं, जिन्होंने जानबूझ कर बैंकों के 7685 करोड़ दबाए हुए हैं।
इनके अलावा जीके जोशी, सचिव पीबीइएफ, जेेएस मांगट, संजीव भल्ला, पवन गिल, पवन बस्सी, एससीएस विर्क, बलराज साहनी, बलजीत कौर, आरके धवन, दलीप शर्मा, प्रेम कुमार, नरेश बजाज ने भी हड़ताली बैंक कर्मियों की रैली को संबोधित किया। इस हड़ताल के तहत जालंधर के सभी सरकारी बैंक पूरी तरह से बंद थे, मगर कुछ प्राइवेट बैंक खुले रहे।