मॉडर्न जेल में सीवर की निकासी न होने से गंदा पानी जेल प्रशासन और कैदियों
के लिए जंजाल बन गया है। जेल प्रशासन को जेल की दीवारों के ऊपर से पाइप
डालकर किसानों के खेतों में गंदा पानी छोड़ना पड़ रहा है। अगर ऐसा न किया
जाए तो माडर्न जेल में गंदा पानी हर तरफ फैल जाएगा।
70 करोड़ से बनी 76
एकड़ में फैली जेल का उद्घाटन नवंबर 2011 में मुख्यमंत्री पंजाब प्रकाश
सिंह बादल ने किया था। विदेशी जेलों की तर्ज पर ओमेक्स कंपनी ने दो साल से
कम समय में जेल का निर्माण पूरा कर दिया था। जेल में सीसीटीवी, एक्सरे
स्कैनर, फायर लाइटिंग सिस्टम, रेन हार्वेस्टिंग सिस्टम और सीवरेज ट्रीटमेंट
प्लांट सहित कई अन्य आधुनिक सुविधाएं हैं।
जेल परिसर में 5-6 करोड़ की
लागत से सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया गया था। शुरुआती दौर में तो
वह चला, लेकिन पिछले कुछ माह से प्लांट बंद है। जेल में बंद करीब 3900
कैदियों और जेल स्टाफ को मिला करीब 4300 लोग पानी प्रयोग में लाते हैं।
पीडब्ल्यूडी, पंजाब पुलिस हाउसिंग कारपोरेशन इसका स्थायी प्रबंध करने में
नाकाम है। जेल के साथ ही निर्माणाधीन सी-साइट परिसर में जेल के सीवर का
पानी गिर रहा है।
एसपी जेल परमजीत सिंह संधू मानते हैं कि उनके पास
सीवर निकासी का प्रबंध नहीं है। चार साल से इसका कोई स्थायी समाधान नहीं
निकल पाया है। सीवर का पानी खेतों में छोड़ने को लेकर कई बार आसपास के
गांवों के लोगों से झगड़े भी हो चुके हैं। मजबूरन उन्हें पाइपों की मदद से
पानी खेतों में छोड़ना पड़ रहा है। अगर वह ऐसा नहीं करते हैं तो ओवरफ्लो
सीवर का पानी जेल परिसर में फैलने लगेगा। पंजाब सरकार को इस तरफ खास ध्यान
देने की जरूरत है वरना हालात बिगड़ सकते हैं। सूत्रों के अनुसार जेल में
कैदियों के जल सप्लाई में कटौती कर दी गई है ताकि ट्रीटमेंट प्लांट का पानी
ओवर फ्लो न हो सके।
जेल के अंदर ट्रीटमेंट प्लांट बनाना गलत
पंजाब
पुलिस हाउसिंग कारपोरेशन के एसई रणजोध सिंह का कहना है कि अप्रैल 2015 तक
सीवर के पानी की निकासी की जिम्मेदारी उनके पास थी। ट्रीटमेंट प्लांट
कनेक्टेड न होने के चलते वह भी पाइपों की मदद से पानी खेतों में ही छोड़ते
थे। उसके बाद से एसपी जेल को पानी की निकासी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
उन्होंने जेल परिसर के अंदर ट्रीटमेंट प्लांट बनाने को गलत करार दिया है।
उनके मुताबिक नियमानुसार प्लांट जेल के बाहर होना चाहिए। जेल में प्रतिदिन
10-12 लाख लीटर पानी प्रयोग होता है।
सीपाइट के ट्रेनिंग अधिकारी
बलविंदर सिंह का कहना है कि सीवर का पानी सीपाइट परिसर में न डाले जाने
संबंधी वह जेल प्रशासन को पांच-छह माह से कई पत्र लिख चुके हैं, लेकिन अभी
तक कोई सुनवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों का दर्द
गांव झल्ल ठीकरीवाल के
किसान जोगिंदर सिंह ने कहा कि पहले उनके खेतों में जेल प्रशासन की ओर से
सीवर का पानी छोड़ा जाता था। इस मामले को लेकर उन्होंने पंजाब सरकार को
पत्र भेजे, जिसके बाद पानी छोड़ने का क्रम बंद हुआ। अब जेल प्रशासन दूसरी
ओर से पानी छोड़ रहा है। गांव भुल्लर बेट के जोगा सिंह के अनुसार सीवर के
पानी की निकासी का प्रबंध जेल प्रशासन को अंदर ही करना चाहिए। अगर खेतों
में ऐसे ही पानी छोड़ा जाता रहा तो फसलों के खराब होने के साथ-साथ लोगों के
गंभीर बीमारियों की चपेट में आने का अंदेशा है।