कच्चे कर्मियों की ओर से मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के पैतृक हलका लंबी में की जाने वाली रैली को असफल बनाने के लिए रविवार को पुलिस प्रशासन ने जगह-जगह नाकाबंदी कर ली। प्रशासन की ओर से लंबी को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया। पुलिस ने लंबी-बादल को आने वाले तमाम रास्तों को सील कर दिया।
मलोट, गिद्दड़बाहा, मंडी डबवाली, कालझरानी, बठिंडा से आने-जाने वाले रास्तों पर पुलिस का इतना सख्त पहरा था कि रैली में आने-जाने वालों को तो रोका गया, यात्रियों की भी गहनता के साथ चेकिंग की जा रही थी। जिन यात्रियों के पास लंबी का टिकट था, उनका पुलिस ने अच्छी तरह से ब्योरा लिया।
पुलिस को जो भी संदिग्ध नजर आता था उसे रोक लिया गया। मलोट-डबवाली मार्ग पर चलने वाली पक्के रूट की बसों को भी गांव के बीच से अन्य रूटों से निकाला गया। शनिवार रात रैली के लिए लंबी के साथ लगते खेल स्टेडियम में टेंट लगा रहे कर्मचारियों को भी पुलिस ने रोक दिया था। जब रविवार सुबह रैली स्थल पर दरियां बिछाई जाने लगी तो पुलिस ने यह सामान भी कब्जे में ले लिया।
यही नहीं कुछ कर्मियों को हिरासत में लेकर कहीं दूर ले जाकर छोड़ दिया। बठिंडा, मानसा, संगरूर, फिरोजपुर, मुक्तसर जिलों में कई जगहों पर लंबी को आने वाले कर्मचारियों को रोके रखा गया। गिद्दड़बाहा में रोके गए कच्चे कर्मियों ने भारु चौक पर धरना लगाते हुए मलोट-बठिंडा हाईवे जाम कर दिया।
मनरेगा श्रमिकों की जत्थेबंदी के प्रांतीय अध्यक्ष वरिंदर सिंह, रमसा अध्यापक दीदार सिंह मुद्की ने कहा कि उनकी अधिकारियों के साथ शांतमयी प्रदर्शन पर बात हुई थी। मगर इसके बावजूद पुलिस ने कर्मचारियों को पकड़ने का सिलसिला शुरू कर दिया। वहीं रविवार को देश भर के 30 हजार कच्चे कर्मचारी सड़कों पर उतर आए, जिनमें से पुलिस ने संघर्ष को दबाने के लिए कुछ को हिरासत में लिए रखा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर आने वाले समय में मांगें न मानी गईं तो लंबी में पक्का मोर्चा लगाया जाएगा।