कनाडा की अदालत ने पंजाबी दंपती को करीब 6 करोड़ रुपये हर्जाना भरने का आदेश दिया है। यह फैसला दंपती के खिलाफ पंजाबी मूल की एक महिला द्वारा दर्ज करवाए गए धोखाधड़ी मामले में सुनाया है। कनाडा में पंजाबी मूल की महिला को पंजाबी दंपती ने ही ठग लिया था। लाखों डॉलर की धोखाधड़ी का शिकार हुईं मंजीत कौर संधू को उस समय न्याय मिला जब एक सिविल कोर्ट ने पंजाबी दंपती कुलदीप विर्क और मीरा विर्क को 9 लाख 76 हजार डॉलर यानी करीब 6 करोड़ की राशि हर्जाने के तौर पर देने का आदेश दिया।
फैसले में 20 हजार डॉलर यानी 1 लाख 20 हजार खर्च के तौर पर अलग से देने का भी आदेश दिया गया। मंजीत कौर संधू को दुबई में निवेश के जरिये खूब पैसा कमाने का सब्जबाग दिखाया गया। धोखेबाजों के जाल में फंसकर मंजीत कौर संधू ने जिंदगीभर की जमापूंजी विर्क दंपती को सौंप दी। मंजीत कौर संधू की मुलाकात विर्क दंपती से एक रिश्तेदार के जरिये हुई थी जो मीरा विर्क का दोस्त था। मंजीत कौर संधू से 2 लाख डॉलर यानी 1 करोड़ 20 लाख वसूले गए, लेकिन कुछ दिन बाद मीरा विर्क ने फिर फोन करके कहा कि दुबई वाला प्रोजेक्ट पूरा होने वाला है और कुछ और पैसों की जरूरत होगी। इसके बाद 2 लाख डॉलर यानी एक करोड़ 20 लाख का बैंक ड्राफ्ट थमा दिया गया।
कोर्ट के फैसले के मुताबिक विर्क दंपती ने मंजीत कौर संधू को एक प्रॉमिसरी नोट भी लिखा, जिसमें 10 फीसदी ब्याज देने और चार महीने के अंदर रकम लौटाने का वादा था, लेकिन तीन महीने बाद कथित ठगों ने मंजीत कौर संधू से फिर संपर्क किया और कहा कि प्रोजेक्ट पूरा होने वाला है और 1 लाख डॉलर यानी 60 लाख रुपये और चाहिए होंगे। इस बार भी मंजीत ने रकम दे दी। तीन माह बाद अचानक मीरा विर्क ने फोन पर एक लाख डॉलर यानी 60 लाख रुपये और मांगे। एक समय ऐसा भी आया जब मीरा विर्क ने फोन उठाना बंद कर दिया। मंजीत कौर संधू को न तो मूलधन मिला और न ही ब्याज। जज ने अपने फैसले में लिखा कि बीबी संधू डिप्रेशन से गुजर रही थीं। उन्हें अपना घर बेचकर एक छोटा घर खरीदना पड़ा। कोर्ट के अनुसार, हर्जाने की कुल राशि 11 लाख 41 हजार डॉलर थी, लेकिन मामले से जुड़े कुछ अन्य पक्षों ने मंजीत कौर संधू के साथ अदालत के बाहर समझौता कर लिया, जिसके बाद 3 लाख 30 हजार रुपये कम कर दिए गए।