फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पंजाब निकाय चुनाव: 1997 के बाद पहली बार भाजपा के बिना मैदान में उतरा अकाली दल, पूरे नहीं उतार पाया उम्मीदवार

Sat, 14 Dec 2024 08:25 AM IST
निवेदिता वर्मा सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)

सार

1997 के बाद पहली बार है कि अकाली दल, भाजपा से अलग होकर निकाय चुनाव लड़ रहा है। यही वजह है कि शहरी एरिया में होने जा रहे चुनाव में अकाली दल को कई इलाकों में प्रत्याशी नहीं मिले हैं।
विज्ञापन
सुखबीर बादल - फोटो : X @Akali_Dal_
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

21 दिसंबर को पंजाब में निकाय चुनाव होने जा रहे हैं। 1997 के बाद पहली बार है कि अकाली दल, भाजपा से अलग होकर निकाय चुनाव लड़ रहा है। यही वजह है कि शहरी एरिया में होने जा रहे चुनाव में अकाली दल को कई इलाकों में प्रत्याशी नहीं मिले हैं। शिअद ने पांचों नगर निगम में ऑब्जर्वर भी नियुक्त किए लेकिन फिर भी कई इलाकों में उम्मीदवार पूरे नहीं हो पाए।

विज्ञापन


हरीश राय ढांडा को जालंधर, बिक्रम सिंह मजीठिया और गुलजार सिंह रणीके को अमृतसर, बलदेव सिंह खैहरा को फगवाड़ा, मंतार सिंह बराड़ और एसआर कलेर को लुधियाना, एनके शर्मा और गुरप्रीत सिंह राजू खन्ना को पटियाला नगर निगम चुनावों के लिए ऑब्जर्वर नियुक्त किया गया था।

तीन बड़े निगमों में इतने उम्मीदवार

पटियाला में अकाली दल 55 उम्मीदवारों को ही उतार पाया। पांच वार्डों में अकाली दल उम्मीदवार खड़े नहीं कर सका। इन वार्डों में वार्ड नंबर 15, 17, 33, 45 और 60 शामिल हैं। 

लुधियाना में अकाली दल मेयर बनाता रहा है लिहाजा वहां पर अकाली दल के उम्मीदवार पूरे मिल गए हैं। लुधियाना में अकाली दल ने 95 में से 94 सीटों पर उम्मीदवारों को टिकट दिया है। 

विज्ञापन


अमृतसर में अकाली दल 85 में से 67 सीट पर उम्मीदवार उतार पाया है। हालांकि वहां पर कमान बिक्रम मजीठिया के हाथ में थी। 

जालंधर में सबसे बुरा हाल

जालंधर में सबसे अधिक बुरा हाल हुआ है। यहां पर अकाली दल 85 में से सिर्फ 29 सीट पर मैदान में है। अकाली दल के वरिष्ठ नेता सुखमिंदर सिंह राजपाल का कहना है शहरों में अकाली दल अभी तक भाजपा के साथ मिलकर मैदान में उतरता रहा है। अधिकतर सीट भाजपा के पास होती है, इसलिए अकाली दल के पास कम उम्मीदवार हैं।

वहीं, जालंधर से अकाली दल के वरिष्ठ नेता इकबाल ढींडसा की पत्नी आजाद तौर पर मैदान में हैं। वह तकड़ी पर चुनाव नहीं लड़ रही हैं। उनका कहना है कि हमारे इलाके का फैसला है कि आजाद उम्मीदवार को जिताया जाए। पहले भी उनकी पत्नी आजाद तौर पर जीत चुकी हैं।

विज्ञापन


अकाली दल के सीनियर नेता भी मैदान में नहीं दिख रहे। हालांकि लोकसभा चुनाव मोहिंदर सिंह केपी अकाली टिकट पर लड़े थे।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें