उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल ने दावा है कि अगले आठ महीने बाद पंजाब के गांवों में फोर-जी की वह सभी सुविधाएं पहुंच जाएंगी, जो अमेरिका के कई गांवों में अब तक नहीं पहुंच पाई है।
दो दिवसीय एनआरआई सम्मेलन को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री ने प्रवासी भारतीयों से तीन साल का समय मांगते हुए कहा कि तीन साल में पंजाब का हुलिया बदल दिया जाएगा। पंजाब में ऐसी सड़के दिखेंगी, जैसी कनाडा और अमेरिका में दिखाई देती हैं।
शनिवार को जालंधर में यह दो दिवसीय सम्मेलन बिना किसी बड़ी घोषणा के सम्पन्न हो गया। हालांकि मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल सहित पंजाब सरकार के अन्य मंत्रियों ने एनआरआईज को राज्य में निवेश के लिए प्रोत्साहित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
सरकार की ओर से एनआरआईज निवेशकों को पंजाब में विशेष सुुविधाएं देने की पेशकश की गई। साथ ही, राज्य में फिलहाल उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का भी जोरशोर से जिक्र किया गया।
शनिवार को समारोह में मौजूद राजस्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया, शिअद एनआरआई विंग के प्रधान सुरजीत सिंह रखड़ा, कनाडा के यूनियन मिनिस्टर टिम उप्पल, कनाडा के यूनियन खेल मंत्री बल गोसल, पाकिस्तान से सांसद रमेश सिंह अरोड़ा, कैलिफोर्निया से मेयर अमनप्रीत सिंह धालीवाल, यूके से सांसद दलजीत सिंह राणा ने भी अपने संबोधन में पंजाब सरकार द्वारा निवेश को बढ़ावा देने के लिए उठाए जा रहे कदमों की सराहना की।
न्यूजीलैंड से सांसद कमलजीत बख्शी ने इस मौके पर मुख्यमंत्री बादल से कहा कि एनआरआई का तन-मन पंजाब के लिए है लेकिन धन सरकार का होना चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड और पंजाब दोनों कृषि प्रधान हैं, इसलिए दोनों में तालमेल बनना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हम न्यूजीलैंड से कुछ चीजें निर्यात करें तो कुछ पंजाब से भी निर्यात हो।
यूके से सांसद दलजीत राणा ने कहा, पंजाबी मूल के लोग अलग-अलग देशों में राज कर रहे हैं। विदेशों में चुने गए सांसदों की एक एसोसिएशन ऑफ पार्लियामेंट बनाई जाए ताकि लोग अपनी मिट्टी से जुड़े रहें।
मानवाधिकार उल्लंघन पर चिंता
कनाडा के यूनियन मिनिस्टर टिम उप्पल ने कहा कि कनाडा के सिखों के लिए पंजाब में मानवाधिकारों का उल्लंघन एक अहम मुद्दा है। इसके अलावा संघीय स्तर के मुद्दे भी हैं।
टिम उप्पल ने कहा कि चंडीगढ़ वीजा केंद्र से टूरिस्ट वीजा आवेदन की सफलता दर बढ़ी है। जहां पहले चंडीगढ़ कार्यालय में आवेदन करने वाले लोगों में से 34 फीसदी को ही वीजा मिलता था, वह अब 54 फीसदी को वीजा मिल रहा है।