आजादी के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच से लगातार चली आ रही कड़वाहट और नफरत को दूर करने का प्रयास इस बार दोनों के देशों के वे मासूम करेंगे, जिनके अभिभावक फौजी वर्दी पहने अपनी-अपनी सरहद की रक्षा में डटे हुए हैं।
भारत में सीमा सुरक्षा बल और पाकिस्तान में सरहद पर तैनात पाक रेंजर्स के स्कूली बच्चे एक-दूसरे देश की यात्रा करेंगे। दोनों ओर से यह मासूम दोस्ती का पैगाम लेकर पहुंचेंगे और परस्पर भाईचारे का प्रसार करेंगे। यह प्रयास सफल रहने पर दोनों देशों से कालेजों के विद्यार्थियों की यात्रा शुरु की जाएगी।
हाल ही में सीमा सुरक्षा बल के डीजीपी सुभाष घोष के साथ पंजाब फ्रंटियर के आईजी, राजस्थान बार्डर, गुजरात और जेएंडके सीमा के आईजी पाकिस्तान के लाहौर में गए थे। जहां पर पाकिस्तानी रेंजर्स के आला अधिकारियों के साथ लंबी वार्ता के दौरान इस योजना पर दोनों तरफ से सहमति प्रकट कर इससे सकारात्मक परिणाम की उम्मीद जताई गई। भारतीय सीमा सुरक्षा बल की तरफ से इस योजना को पाकिस्तान रेंजर्स के आगे रखा गया, अधिकारियों की इस योजना पर पाकिस्तानी रेंजर्स ने तत्काल हामी भर कर अपनी मोहर लगा दी।
प्रथम चरण में भारतीय सीमा सुरक्षा बल के जवानों के बीएसएफ स्कूलों में पढ़ने वाले दसवीं से ऊपर की कक्षा के विद्यार्थियों को मौका दिया जाएगा। पाक से आने वाले छात्र जहां भारत में बीएसएफ स्कूलों में जाएंगे वहीं देश की सैर भी कर इसकी कला व संस्कृति की जानकारी भी लेंगे। इसी तरह पाक जाने वाले बीएसएफ के जवानों के बच्चे वहां की पूरी जानकारी हासिल करेंगे। यात्रा का समय कम से कम एक सप्ताह रखा जाएगा।
अगर बीएसएफ के जवानों व पाक रेंजर्स के मासूमों की यात्राएं सफल रहती हैं और इसके सकारात्मक परिणाम मिलते हैं तो बीएसएफ के आला अधिकारी केंद्र सरकार से आग्रह कर इसको केंद्रीय स्कूलों में भी लागू करवाने का यत्न करेंगे। उनका तर्क है कि जब दोनों देशों की सीमा सुरक्षा बल के जवानों के बच्चे एक दूसरे देश की यात्रा कर वहां पर दोस्ताना संबंध कायम करेंगे तो उनके दिलों में जो नफरत व नकारात्मक विचार हैं, वह तो दूर हो जाएंगे और वह अपने देश जाकर दोस्ती का संदेश भी देंगे। उन्होंने कहा कि गेम्स व टूर्नामेेंट भी जवानों के बीच करवाए जाने की योजना है।