पंजाब सरकार ने बिना अंग्रेजी अध्यापक ही अंग्रेजी का मुकाबला करने की योजना बनाई है। इसके लिए पंजाब सरकार ने अपने इंग्लिश मास्टरों को ब्रिटिश काउंसिल से ट्रेनिंग भी दिलाई है।
राज्य में अंग्रेजी अध्यापक ही नहीं हैं लेकिन राज्य सरकार ने पंजाब में पहली से 12वीं तक के बच्चों को इंग्लिश जरूरी की है। सूबे में 2008 के बाद अंग्रेजी अध्यापकों की भर्ती ही नहीं हो सकी है। इस वर्ष भी एक हजार पदों को भरने के लिए ज्ञापन दिया था, लेकिन राज्य सरकार को महज 800 अध्यापकों से ही संतुष्टि करनी पड़ी थी।
शिक्षा विभाग से जुड़े माहिरों की मानें तो 2008 से पहले भी अध्यापकों की भर्ती नहीं हुई थी। इससे पहले स्कूलों में बच्चों को एसएस के अध्यापक ही अंग्रेजी पढ़ा रहे थे। अभी भी हालात सुधरने नहीं हैं। जालंधर जिले की ही बात करें तो हाई, मिडिल तथा सेकेंडरी के 440 स्कूल हैं। इनमें अंग्रेजी पढ़ाने के लिए करीब 100 अध्यापक ही है। बाकी स्कूलों में अब भी एसएस के मास्टर ही इंग्लिश पढ़ा रहे हैं।
अध्यापकों की भारी कमी के बावजूद राज्य सरकार पंजाब के सभी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को विदेशी तकनीक से अंग्रेजी पढ़ाने का दावा कर रही है। इसके लिए शिक्षा विभाग ने अपने अंग्रेजी मास्टरों को ब्रिटिश काउंसिल से ट्रेनिंग लेकर उनके फंडे अपने क्लास रूम में अपनाने के लिए कहा है। पहली कड़ी के तहत 45 अंग्रेजी अध्यापकों को ट्रेनिंग दिलाई गई है। इस प्रोजेक्ट को सफल बनाने के लिए राज्य सरकार ने ब्रिटिश काउंसिल से तीन वर्ष का करार किया है। इस करार के तहत ब्रिटिश काउंसिल के सदस्य पंजाब के अंग्रेजी पढ़ाने वाले अध्यापकों को अंग्रेजी विषय सरल बनाने तथा पाठ पढ़ाने के गुर सिखाएंगे।
ट्रेनिंग लेने वाले एसएस अध्यापकों को सिखाएंगे
इस तकनीक के तहत ब्रिटिश काउंसिल से ट्रेनिंग लेने वाले रिसोर्सपर्सन एसएस मास्टर को स्कूलों में अंग्रेजी पढ़ाने के गुर सिखाएंगे। अभी रिसोर्सपर्सन ने ब्रिटिश काउंसिल से ट्रेनिंग हासिल की है। आगामी माह से अब एसएस मास्टर को ट्रेनिंग देने के लिए डीजीएसई कुमार राहुल ने शेड्यूल जारी कर दिया है।
प्रत्येक स्कूल में होना चाहिए अंग्रेजी का मास्टर
इंग्लिश मास्टर एसोसिएशन के महासचिव शरनजीत सिंह का कहना है कि अभी इंग्लिश में विदेशों से पंजाब काफी पीछे है। पंजाब के हालात ऐसे हैं कि जहां बच्चों के मुकाबले अंग्रेजी अध्यापक ही नहीं हैं। अगर राज्य सरकार ने अंग्रेजी को सभी स्कूलों में लागू किया है तो उस मुताबिक प्रत्येक स्कूल में अंग्रेजी मास्टर का होना जरूरी है।
ब्रिटिश काउंसिल ने पढ़ाया इन्हें अंग्रेजी का पाठ
ब्रिटिश काउंसिल के साथ हुए करार के तहत 45 इंग्लिश अध्यापकों ने पढ़ाने के नुस्खे सीखे हैं। लुधियाना में हुई इसी ट्रेनिंग के तहत जिले के 15 अध्यापकों के सहित लुधियाना, नवांशहर, कपूरथला और होशियारपुर के कुल 45 अंग्रेजी विषय के अध्यापकों को ट्रेनिंग दी गई। ट्रेनिंग से तैयार किए गए मास्टर ट्रेनर अब जनवरी में अपने जिले के स्कूलों में जाकर अध्यापकों को ट्रेनिंग देंगे।
यह होगा क्लास रूम मैनेजमेंट का फंडा
अब तक बच्चों की विषय में इन्वॉल्वमेंट नहीं हो पाती थी। इसका नतीजा था कि सरकार को राज्य में अंग्रेजी अध्यापक ही नहीं मिलते हैं इसलिए अब अध्यापक सब्जेक्ट के हिसाब से बच्चों को एक्टीविटी के माध्यम से उसका मतलब समझाएंगे। ब्रिटिश काउंसिल की तरफ से बीते वर्ष किए गए सर्व में भी यही देखा गया था कि बच्चे एक्टीविटी के माध्यम से जल्दी चीजें सीखते हैं। इसलिए काउंसिल की ट्रेनर कृति ने अध्यापकों को यह समझाया कि बच्चों के माइंड को प्रेजेंट सब्जेक्ट में कैसे जोड़ें और इससे पहले एक से दो मिनट की प्रैक्टिकल एक्टीविटी से वार्म कर उन्हें सब्जेक्ट के साथ आसानी से जोड़ा जा सकता है।