पंजाब की राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव की चर्चा लगातार तेज हो रही है। पिछले दो विधानसभा चुनावों में युवा चेहरों की जीत ने नए समीकरण बनाए हैं। वर्ष 2017 में दविंदर सिंह घुबाया जैसे युवा नेता विधायक बने। 2022 में आम आदमी पार्टी की बड़ी जीत के साथ युवा विधायकों की नई टोली विधानसभा पहुंची।
विज्ञापन
यह बदलाव केवल चुनावी उम्र से नहीं बल्कि नेताओं के राजनीतिक सफर और प्रदर्शन से भी जुड़ा है। 2017 में फाजिल्का से कांग्रेस के दविंदर सिंह घुबाया 25 साल की उम्र में विधायक बने। उन्होंने भाजपा के तत्कालीन मंत्री सुरजीत कुमार ज्याणी को हराया था।
बठिंडा ग्रामीण से आम आदमी पार्टी की रुपिंदर कौर रूबी 29 साल की उम्र में विधायक चुनी गईं। इन जीतों ने प्रदेश की राजनीति में नए उम्मीदवारों के लिए जगह बनाई। वर्ष 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 117 में से 92 सीटें जीतीं। इस चुनाव में 35 साल से कम उम्र के 11 विधायक चुने गए, सभी आम आदमी पार्टी से थे।
विज्ञापन
2022 में युवा विधायकों का कीर्तिमान
संगरूर से नरिंदर कौर भराज ने 27 साल की उम्र में जीत दर्ज की। उन्होंने कांग्रेस के विजय इंदर सिंगला को हराया। खरड़ से अनमोल गगन मान 31 साल की उम्र में विधायक बनीं। आनंदपुर साहिब से हरजोत सिंह बैंस भी 31 साल की उम्र में विधानसभा पहुंचे। बाद में बैंस ने पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी संभाली। फाजिल्का से नरिंदर पाल सिंह सवना 30 साल की उम्र में विधायक चुने गए।
अन्य युवा चेहरे और पुराना इतिहास
बाघापुराना से अमृतपाल सिंह सुखानंद करीब 32 साल की उम्र में विधानसभा पहुंचे। धर्मकोट से देवेंद्रजीत सिंह लाडी ढोस और बटाला से अमनशेर सिंह शेरी कलसी ने भी युवा चेहरे के रूप में जीत दर्ज की। बरनाला से गुरमीत सिंह मीत हेयर 32 साल की उम्र में जीते, वह 2017 में भी विधायक थे। पंजाब की राजनीति में युवा उम्र में चुनावी सफलता का इतिहास पुराना है। शिरोमणि अकाली दल के सुखबीर सिंह बादल 1996 में पहली बार लोकसभा चुनाव जीते थे तब उनकी उम्र करीब 33 वर्ष थी।
दिग्गजों की हार और भविष्य की परीक्षा
सुखबीर बादल ने 1998, 2004 और 2019 में भी लोकसभा चुनाव जीते। पीपीसीसी प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने 2012 में गिद्दड़बाहा से विधानसभा चुनाव जीता। 2022 के विधानसभा चुनाव में कैप्टन अमरिंदर सिंह, प्रकाश सिंह बादल, सुखबीर सिंह बादल, नवजोत सिंह सिद्धू और चरणजीत सिंह चन्नी जैसे बड़े नेताओं को हार मिली।
आम आदमी पार्टी की जीत के साथ कई नए चेहरे विधानसभा पहुंचे। आगामी विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दल कितने युवा चेहरों को टिकट देते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा। युवा विधायकों की बढ़ती मौजूदगी नेतृत्व के बदलते स्वरूप को दर्शाती है।