ट्रांसपोर्ट विभाग व प्राइवेट स्कूल प्रबंधकों की ओर से स्कूल बसों में बच्चों की सुरक्षा के तमाम पुख्ता प्रबंध होने के दावे किए जाते हैं। हकीकत इसके उलट है।
महानगर में चलने वाली ज्यादतर स्कूल बसें सेफ स्कूल व्हीकल पालिसी के मापदंड पर खरी नही उतर रही हैं। इसके बाद भी बसें धड़ल्ले से सड़कों पर दौड़ रही हैं।
स्कूल बसों को सड़कों पर उतरने से पहले सेफ स्कूल व्हीकल पालिसी के तहत तैयार कराना होता है। इस पालिसी के तहत बसों में हाईड्रोलिक दरवाजे, जीपीएस सिस्टम, कैमरे, फर्स्ट एड बाक्स, आग बुझाने वाला यंत्र, निर्धारित स्टैंडर्ड का स्पीड गवर्नर लगाना जरूरी रखा गया है।
वहीं महानगर के स्कूलों के बारे में ट्रांसपोर्ट विभाग के पास जो आंकड़े पहुंचे हैं वह चौंकाने वाले हैं। इन आंकड़ों के मुताबिक जालंधर में इस समय करीब 1500 स्कूल बसें चल रही है।
इन 1500 बसों में अब तक सिर्फ 20 बसों ने फिटनेस टेस्ट पास किया। यह आंकड़ा जालंधर के मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर नरेश कलेर ने विभाग को भेजा है।
रिपोर्ट के मुताबिक जालंधर में दौड़ रही 30 फीसदी स्कूल बसों के पास परमिट ही नहीं है, जबकि 10 फीसदी बसों ने अपना परमिट रिन्यू ही नहीं कराया है।
सेफ स्कूल व्हीकल पालिसी के तहत बसें बच्चों को स्कूल लाने, ले जाने का काम करती है लेकिन 99.2 फीसदी बसें असुरक्षित तरीके से सड़कों पर दौड़ रही हैं।
इस मामले में डीटीओ आरपी सिंह का कहना है कि कानून का उल्लंघन करने वाली स्कूल बसों पर कार्रवाई की जाती है। स्कूलों को जल्द से जल्द फिटनेस टेस्ट पास कराने व सेफ स्कूल व्हीकल पालिसी के तहत बसें चलाने के लिए कहा जा रहा है।