पंजाब सरकार प्राथमिक शिक्षा से ज्यादा शराब को तरजीह देती नजर आ रही है। अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि प्रदेश में प्राइमरी स्कूलों से कहीं ज्यादा शराब के ठेके हैं।
हर बार लोकसभा चुनाव के दौरान सियासी दल अपने एजेंडे में भले ही प्राथमिक शिक्षा को बढ़ावा देने का मुद्दा शामिल करें, लेकिन चुनाव के बाद इस दिशा में अपेक्षित प्रयास कभी नहीं हुए। आंकड़े इस बात के गवाह है कि प्रदेश में शिक्षा विभाग द्वारा संचालित महज 7691 प्राइमरी स्कूल ही हैं। जबकि अकेले लुधियाना में ही शराब के 1332 ठेके हैं।
प्रदेश में राजकीय हाई स्कूल, मिडिल स्कूल तथा सीनियर सेकेंडरी स्कूलों की स्थिति भी ठीक नहीं है। मगर, शिक्षा विभाग राज्य में कुल स्कूलों की गिनती को अधिक मान रहा है। अधिकारियों का कहना है कि कुल स्कूलों की गिनती अधिक है। इनमें लोकल बाडी डिपार्टमेंट के प्राइमरी स्कूल, एडेड प्राइमरी स्कूल तथा कई स्पेशल स्कूल भी शामिल हैं।
दूसरी ओर आंकड़े बताते हैं कि राज्य में तकरीबन 9699 शराब के ठेके हैं। लुधियाना इस समय शराब के ठेकों में सबसे आगे हैं। लुधियाना में 1332 ठेके हैं। ऐसे ही जालंधर में 1364 शराब के ठेके हैं।
शिक्षा माहिरों की मानें तो प्राइमरी शिक्षा प्रत्येक बच्चे का अधिकार है। कहने के लिए सर्व शिक्षा अभियान के तहत व आरटीई एक्ट के मुताबिक छह से 14 वर्ष का कोई भी बच्चा स्कूल से बाहर नहीं होना चाहिए। मगर वास्तविकता इससे परे है।
शराब से आमदनी, स्कूलों पर होता है खर्चा : भाटिया
उपमंडल शिक्षा अधिकारी पद से सेवा मुक्त हुए बीएस भाटिया का कहना है कि इन हालातों के लिए सरकार की सोच जिम्मेवार है। सरकार को शराब बेचने पर कमाई होती है और स्कूल खोलने पर खर्च। यही कारण है कि दिन प्रति दिन पंजाब सरकार मर्जर के नाम पर स्कूलों को बंद कर रही है और शराब के ठेके खोले जा रहे हैं।
होशियारपुर में हैं सबसे अधिक प्राइमरी स्कूल
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक होशियारपुर की आबादी अधिक नहीं है। मगर, इस जिले में शिक्षा विभाग के आंकड़ों बताते हैं कि यहां सबसे अधिक प्राइमरी स्कूल हैं। जिले में प्राइमरी स्कूलों की गिनती 707 है। सबसे कम प्राइमरी स्कूलों की लिस्ट में बरनाला है। बरनाला में मात्र 124 स्कूल हैं। जबकि अमृतसर में 623 स्कूल हैं और यहां शराब के ठेकों की संख्या 785 है।