पठानकोट। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय द्वारा पठानकोट को दूसरी बार खुले में शौच मुक्त घोषित किया गया है। इससे पहले पठानकोट को ओडीएफ (ओपन डेफिकेशन फ्री) का सर्टिफिकेट मिला था। वहीं, इस बार ओडीएफ प्लस-प्लस का प्रमाण दिया गया है। बता दें कि पठानकोट प्रदेश का दूसरा जिला है, जिसे ओडीएफ प्लस-प्लस का प्रमाणपत्र मिला है। इससे स्वच्छता सर्वेक्षण की रैंकिंग में सुधार होगा। इससे पहले यह दर्जा बठिंडा को मिला था।
दरअसल, केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने निगम के दावे की सच्चाई जानने के लिए थर्ड पार्टी क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया से सर्वे करवाया था। इसमें शहर के 11 पब्लिक शौचालय और 32 सड़कों का मुआयना किया गया था। इसी के तहत यह दर्जा दिया गया। इस संबंध में नगर निगम हेल्थ ब्रांच प्रमुख डॉ. एनके सिंह, चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर जानू चलौत्रा, सीएसआई दीपक कुमार, सीएसआई विक्रमजीत सिंह, एसआई अजय बैंस एडीसी-कम-अतिरिक्त निगम कमिश्नर से मिले और बेहतर गाइडेंस के लिए धन्यवाद किया। इससे पहले शहर को 2019-20 में खुले में शौच मुक्त घोषित किया गया। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय का यह दर्जा सिर्फ एक वर्ष के लिए होता है। उसके बाद दोबारा आवेदन करना पड़ता है। निगम ने बीते दिनों दोबारा आवेदन किया था।
सीएसआई जानू चलौत्रा का कहना है कि शहर ने गार्बेज फ्री सिटी की फाइव स्टार रेटिंग के लिए अनिवार्य शर्त पूरी की है। जब तक शहर को ओडीएफ प्लस-प्लस का प्रमाणपत्र नहीं मिलता, तब तक गार्बेज फ्री सिटी के लिए आवेदन नहीं कर सकता है। स्वच्छता का सर्वेक्षण भी जारी है। अभी तक सिटीजन फीडबैक में पठानकोट दूसरे नंबर पर बना है। ओडीएफ प्रमाणपत्र मिलने के बाद 600 अंक जुड़ेंगे।