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खुले मेनहोल और टूटे ढक्कन बने हादसों की वजह

Fri, 06 Nov 2015 03:27 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जालंधर
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शहर के खुले मेनहोल और टूटे सीवरेज के ढक्कन हादसे की वजह बन रहे हैं। नगर निगम के रिकॉर्ड के अनुसार शहर में 20 हजार से ज्यादा सीवरेज के ढक्कन लगे हैं।
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इनमें से 120 से ज्यादा खुले मेनहोल और टूटे सीवरेज के ढक्कन शामिल हैं। कुछ दिनों पहले खुले मेनहोल गिरने की वजह से चार साल के मासूम की मौत के बाद निगम प्रशासन फिर से जागा।

इसके बाद शहर के खुले और टूटे सीवरेज के ढक्कनों को ठीक करवाने का काम शुरू किया गया है। निगम प्रशासन के ओएंडएम विभाग की लेटलतीफी से टूटे ढक्कनों को ठीक और खुले मेनहोल को बंद करने में काफी समय लग रहा है।
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इससे जब एक जगह पर समस्या का हल होता है तो दूसरी जगह सीवरेज के ढक्कन टूटने की समस्या पैदा हो जाती है, जो कई दिनों तक ठीक नहीं होती है।


निगम की लापरवाही शहरवासियों की जान की दुश्मन बन गई है। बच्चे खुले मेनहोल में गिर रहे हैं तो लोग इनसे टकराने की वजह से घायल हो रहे हैं।

चंद अफसरों और मुलाजिमों की लापरवाही से हादसे बढ़ते जा रहे हैं। सीवरेज के कई मेेनहोल खुले और टूटे होने से निगम सभी को ठीक कर पाने में सफल नहीं हो पाया है।


शहर के सीवरेज सिस्टम में मेनहोल पर लगने वाले सीवरेज के ढक्कनों के टूटने की वजह घटिया मैटीरियल है। ठेकेदारों की ओर से मेनहोल को बनाने में बेहतर मैटीरियल इस्तेमाल नहीं किया जाता है।
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मेनहोल पर लगने वाला ढक्कन भी हलकी क्वालिटी का होता है।


टूटे ढक्कन को ठीक करवाने और खुले मेनहोल को बंद करने के लिए इंजीनियरों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। इंजीनियरों के नेतृत्व में बनाई टीम शहर के हर वार्ड में निरीक्षण कर रही है। खस्ताहाल सीवरेज के ढक्कनों को ठीक करवाया जा रहा है।
-लखविंदर सिंह, एसई, नगर निगम 
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