शहर में बीतेे दिनों कांग्रेसी पार्षद सुशील रिंकू पर दर्ज केस के मामले में बेशक भाजपा के नेता डीजीपी से मिलकर सख्त कार्रवाई की मांग कर चुके हैं।
वहीं रिंकू को अपनी पार्टी के नेताओं से भी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। रिंकू का नाता कांग्रेस के प्रधान प्रताप सिंह बाजवा से है, जबकि पार्टी में ही उसका विरोध करने वाले कांग्रेसी कैप्टन गुट से हैं। यही वजह है कि जालंधर की कांग्रेस एकजुट होकर रिंकू के पक्ष में जोरदार ढंग से आवाज बुलंद नहीं कर पाई है।
जालंधर में पूर्व सांसद मोहिंदर सिंह केपी, पूर्व मंत्री अवतार हेनरी, जिला प्रधान राजिंदर बेरी, प्रदेश महासचिव तजिंदर सिंह बिट्टू कैप्टन गुट के हैं।
वहीं सुशील रिंकू की नजदीकियां प्रताप सिंह बाजवा से काफी रही हैं। यही वजह है कि मंगलवार को जब रिंकू डीजीपी से मिलने चंडीगढ़ गए तो उनके साथ पीपीसीसी प्रधान प्रताप बाजवा के खासमखास नेता थे। इस दौरान कैप्टन गुट का एक भी कांग्रेसी उनके साथ नहीं गया।
रिंकू और पूर्व सांसद मोहिंदर सिंह केपी में बीते कई सालों में राजनीतिक शह मत चली आ रही है। यही वजह है कि जालंधर के कांग्रेसी एकजुट होकर पुलिस कमिश्नर के पास नहीं जा पाए हैं।
जानकारी के मुताबिक बीते दिनों रिंकू के पक्ष में कांग्रेसी पार्षदों की बैठक बुलाई गई थी। वहीं इसको रद्द करना पड़ा, क्योंकि कई पार्षदों ने रिंकू को अपनी मजबूरी बताई कि वह उसकी मदद के लिए खुलकर नहीं आ सकते हैं।