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डेंगू से मासूम की मौत: पहले पिता के पास भर्ती कराने के लिए पैसे नहीं थे, बाद में डॉक्टरों ने ध्यान नहीं दिया

Wed, 02 Nov 2022 04:02 PM IST
निवेदिता वर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, जालंधर (पंजाब)

सार

अंगद ने बताया कि एक महीने से चावला हॉस्पिटल में उनके बेटे का इलाज चल रहा था। कई बार टेस्ट हुए थे, तब डॉक्टर ने नहीं बताया था कि बेटे को डेंगू है। बेटे की मौत के एक घंटे बाद रिपोर्ट देखकर डॉक्टर कह रहे हैं कि बेटे को डेंगू है।
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बच्चे की मौत पर बिलखता पिता। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।
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विस्तार
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जालंधर के किला मोहल्ला के प्रवासी मजदूर के तीन माह के बच्चे को डेंगू ने लील लिया और स्वास्थ्य विभाग कह रहा है कि उन्होंने डेंगू से निपटने के लिए पूरे इंतजाम किए हैं। बुधवार सुबह 9 बजे किला मोहल्ला के अंगद बेटे की तबीयत बिगड़ने पर पत्नी के साथ उसे चावला हॉस्पिटल लेकर आए। यहीं से उसका दो हफ्तों से बराबर इलाज चल रहा था। ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर और नर्सों ने एक घंटे बिठाए रखने के बाद ब्लड सैंपल लेकर टेस्ट के लिए भेज दिया। जब तक रिपोर्ट आई, 11 बजे के करीब बच्चे की मौत हो गई। 

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अंगद ने आरोप लगाया कि डॉक्टर की लापरवाही से बच्चे की मौत हुई है जबकि डॉक्टर ने परिजनों को ही बच्चे की मौत का जिम्मेदार बताया। दरअसल, मंगलवार को अंगद अपने बेटे को दिखाने आए थे तब डॉक्टर ने बच्चे की हालत देख उसे भर्ती कराने को कहा लेकिन अंगद ने पैसे की कमी होने की बात कहकर दवाई ली और चले गए। बुधवार सुबह नौ बजे जब बच्चे की तबीयत ज्यादा खराब हुई तो अंगद उसे अस्पताल लेकर आए और डॉक्टर को बताया कि बच्चे की तबियत ज्यादा खराब है। किसी ने ध्यान नहीं दिया। 

अंगद ने बताया कि एक महीने से चावला हॉस्पिटल में उनके बेटे का इलाज चल रहा था। कई बार टेस्ट हुए थे, तब डॉक्टर ने नहीं बताया था कि बेटे को डेंगू है। एक हफ्ते से तेज बुखार आ रहा था। बेटे की मौत के एक घंटे बाद रिपोर्ट देखकर डॉक्टर कह रहे हैं कि बेटे को डेंगू है, अगर पहले पता होता तो चोरी करता या डाका डालता पर बेटे को ऐसी लाचारी की मौत नहीं मरने देता। दूसरी ओर मां का रो-रोकर बुरा हाल है, क्योंकि डॉक्टर-पिता की अनदेखी ने उसका बेटा छीन लिया। परिजन डॉक्टर से लापरवाही पर सवाल करने लगे तो पुलिस बुला ली गई और परिजनों को धमकाया गया। 
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करोड़ों के अस्पताल में बड़े घराने तो छोड़ो गरीब भी नहीं करा रहा इलाज
सिविल अस्पताल में डेंगू का इलाज किस तरह से हो रहा है, इसका नतीजा सामने हैं जहां बड़े घराने के लोग तो छोड़ो मजदूर-गरीब भी इलाज करवाने से परहेज कर रहे हैं। जब सिविल सर्जन डॉ रमन शर्मा से डेंगू से बच्चे की मौत पर सवाल किया तो भड़कते हुये बोले, इसमें हमारी क्या गलती, हम लोगों को जागरुक कर रहे हैं और बुखार आने पर तुरंत डॉक्टरों को दिखाने की बात कर रहे हैं पर लोग ही नहीं आना चाहते। 100 में से एकाध ऐसे केस होते हैं तो सरकारी अस्पतालों को कोसो मत, हम सुविधायें दे रहे हैं डेंगू वार्ड बना हुआ है, दवाई कम पर हैं, स्टॉक मंगवाया है और हमारी टीम लगातार काम कर रही है। 

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