पठानकोट। साहित्य कलश ने उर्दू के महान शायर मिर्जा गालिब की पुण्यतिथि पर सोमवार को ‘एक शाम मिर्जा गालिब के नाम’ ऑनलाइन कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें देश के विभिन्न राज्यों से कई साहित्यकारों ने भाग लिया। साहित्य कलश के अध्यक्ष डॉ. मनु शर्मा ने महान शायर मिर्जा गालिब के जीवन के विभिन्न पहलुओं के बारे में बताया और उनकी गजल ‘हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले बहुत न निकले, मेरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले’ की प्रस्तुत दी।
पटियाला से सागर सूद ने ‘हर एक बात पे कहते हो कि तू क्या है, तुम ही कहो कि अंदाज-ए-गुफ्तगू क्या है’ सुनाई। साथ ही आगरा से बीना एब्राहम ने गजल ‘मेहरबां होकर बुला लो मुझे चाहे जिस वक्त’, जोधपुर से राखी रैना ने गजल ‘आह को चाहिए इक उम्र असर होने तक कौन जीता है तेरी जुल्फ के सर होने तक’ की प्रस्तुत दी। धारीवाल से कुसुम खुशबू ने गजल ‘दिल ए नादान तुझे हुआ क्या है आखिर इस दर्द की दवा क्या है’ पेश का वाहवाही लूटी।
वहीं, पटियाला से विजेंदर ठाकुर ने ‘वफा हमसे तो गैर उसको जफा कहते हैं, होती आई कि अच्छों को बुरा कहते हैं’ सुनाई। पठानकोट से रमन गुप्ता ने मिर्जा गालिब की गजल ‘यह न थी हमारी किस्मत कि विसाले यार होता अगर और जीते रहते यही इंतजार होता’ और पातडां से नीता एहसास ने ‘चाहिए अच्छों को जितना चाहिए, अगर चाहे तो फिर क्या चाहिए’ पेश की। मंच संचालन डॉ. मनु शर्मा ने ने किया। इस अवसर पर मनीष चौहान, रितेश महाजन, सौरभ गुप्ता, मनीष शर्मा, सागर सूद, विजेंद्र ठाकुर, कुसुम खुशबू, राकेश लाल, एसडी भल्ला और राजेश बजाज मौजूद रहे।