ओला कैब कंपनी की ओर से अनुबंध कर रखे गए टैक्सी चालकों के साथ चल रहा
विवाद गहरा गया है। करीब 200 टैक्सी संचालक खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं।
वहीं, भारतीय जनता पार्टी टैक्सी संचालकों के हक में खुलकर सामने आ गई है।
मंगलवार को दो सौ टैक्सी संचालक भाजपा ट्रांसपोर्ट सेल के प्रधान अमरजीत
सिंह अमरी की अगुवाई में डीटीओ आरपी सिंह से मिले।
उन्होंने ईटीओ को बताया
कि कंपनी की ओर से 200 लोगों के साथ लिखित अनुबंध किया गया था। इसके
अनुसार उनको पचास हजार रुपये प्रति माह अदा किए जाने थे, लेकिन बाद में 38
हजार प्रति माह पर समझौता हुआ। अब सभी टैक्सी चालकों को कह दिया है कि वह
जितनी बुकिंग देंगे, उसका 10 फीसदी शेयर टैक्सी चालक को मिलेगा। भाजपा नेता
अमरजीत सिंह अमरी ने बताया कि ओला कंपनी का सिस्टम था कि कोई भी अपनी कार
वहां आकर रजिस्टर्ड करवा सकता था। फिर कंपनी उनको एरिया दे देती थी और फोन
काल पर वे यात्री को लेने जाते थे।
ओला कैब कंपनी के साथ जुड़ने को कई
लोगों ने बैंकों से कर्ज लेकर टैक्सियां डाल ली, ताकि उनको पचास हजार प्रति
माह मिल सके। वे बैंक की किस्त अदा करने के बाद भी 15-20 हजार कमा लेंगे।
बाद में कंपनी ने कह दिया कि सिर्फ 38 हजार रुपये प्रति माह टैक्सी चालकों
को दिए जाएंगे। इस पर भी सभी चालक राजी हो गए थे, लेकिन अब अचानक सारा ठेका
और समझौता रद्द कर दिया गया है।
साथ ही कहा जा रहा है कि जितनी बुकिंग
आएगी, उसका 10 फीसदी ही टैक्सी चालक को दिया जाएगा। अमरी ने कहा कि मंगलवार
को वे सभी चालकों के साथ डीटीओ से मिले हैं। डीटीओ ने ओला कैब के
प्रबंधकों को बुधवार सुबह 10 बजे बुलाया है। वहीं इस बारे में बार-बार ओला
कैब प्रबंधकों से संपर्क करने की कोशिश की जाती रही, लेकिन संपर्क नहीं हो
पाया है।